दुनिया भर के हस्त शिल्प कामगारों की कारीगरी को आप तक पहुंचाने के लिए सूरजकुंड मेला शुरू होने वाला है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 1 फरवरी को 11 बजे जिसका उदघाटन करेंगे। मेले में इस बार उज़्बेकिस्तान मेहमान देश होगा।

सूरजकुंड का इतिहास

सूरजकुंड यानि 6 एकड़ में एक तालाब है, जिसमें सूरज डूबता है। इसकी बनावट यूनानी रंगभूमि से बहुत मिलती जुलती है। जिसे तोमर वंश के राजा सूर्यपाल ने बनवाया था। इसके निर्माण का कारण सूर्यदेव की उपासना और पानी स्रोत जमा करना था। यह जगह दिल्ली के नज़दीक होने के बाद भी बहुत दिनों तक गुमानमी में रही।

साल 1987 में पहली बार भारतीय हस्तशिल्प कला को प्रोत्साहन देने के लिए सूरजकुंड मेले का आयोजन किया गया। साल 2013 में शिल्प मेले को अंतारष्ट्रीय मेले का दर्जा दिया गया। इस साल 1 फरवरी से इसका 34वां आयोजन शुरु होगा जो 16 फरवरी तक चलेगा।

क्या-क्या कर सकते हैं

खरीद सकते हैं: होम फर्निशिंग और सजावट के सामान, लकड़ी से बने घरेलू सामान, मधुबनी पेंटिंग, पत्ती चित्र (पेंटकारी), बांस की पेंटिंग, कश्मीरी, अफ़ग़ानिस्तान और कई जगहों की बनी कालीन, लैंप, चमड़े और कागज के दीवार पर लटकने वाले सामान, रसोई के बर्तन टेबलवेयर हथकरघा और वस्त्र, शॉल, साड़ी, जैकेट, शर्दियों के कपडे, महिलाओं के कपड़े आदि।

क्या खा सकते हैं: आप सूरजकुंड मेला अगर जायें तो थक जाने के बाद ख़ाना जरूर खायें। भारत के हर राज़्य की डिश वहां आपको मिलेगी, हरियाणां का जलेबा, लखनऊ का रोगन जोश, पंजाब का कढ़ी चावल,राजस्थान के गट्टे तकरीबन हर तरह का खाना आपको मिल जायेगा।

देख, सुन सकते हैं: सांस्कृतिक कार्यक्रम में आप इस बार हर राज्य के सांस्कृतिक कार्यक्रम, हिमाचल का फॉक कल्चर शास्त्रीय संगीत प्रदर्शन, कविता पाठ ऐसे कई और भी कार्यक्रम सुन सकते हैं।

कब: 1 फरवरी से  16 फरवरवी, रोज़ सुबह 10.30 बजे से शाम 8.30 बजे तक

कहां: लेकवुड सिटी, सूरजकुंड, फरीदाबाद