दिल्ली के कमानी ओडीटोरियम में पहली बार कुछ ऐसा होने जा रहा है जो अब तक तो नहीं हुआ है। मंड़ी हाऊस कमानी ओडिटोरियम में पहली बार हॉरर नाटक होने जा रहा है। रोहित रॉय के साथ सयानतानी घोष, दिक्षा रैना, दीक्षा अग्नीहोत्री स्टेज पर नाटक में मुख्य भूमिका निभायेंगे।

फ़िल्मों में तो ड़रावने भूत,  अपने आप उड़ती हुई चीजें, आप आप बंद होते दरवाजे, पैरानार्मल एक्टीविटीज बहुत बार देखी होंगी। थिएटर में लेकिन यह पहली बार स्टेज पर होने जा रहा है। यह कैसे होगा? क्या निर्देशक दर्शकों ड़र का माहोल फील करा पायेंगे? निर्देशक ने आखिर स्टेज पर ऐसा क्या करेंगे। आईये निर्देशक अनीकेत किशोर पाटिल की ही ज़बानी जानते हैं।

इस नाटक निर्देशक कहानी के बारे में बताते हैं कि ”  यह हिन्दी में पहली बार हो रहा है कि कोई हॉरर, थ्रिलर स्टेज पर हो रहा है। यह दर्शकों के लिए पूरी तरह एक नया तजुर्बा होगा जिसमें वह ड़रते-ड़रते भी ड़र का मजा लेगा।

निर्देशक किशोर पाटिल हिन्दी से पहले इस नाटक को गुजराती और मराठी में कर चुके हैं। उनके कहे मुताबिक नाटको को लोगों ने काफी पसंद किया था। इस नाटक से पहले स्टेज पर किसी ने हॉरर नाटक करने का जोख़िम नहीं उठाया है। हिन्दी में पहली बार देखने को मिलेगा।

दर्शक थिएटर हॉल में डर का माहोल फील कर सकें उसके लिए स्पेशल इफेक्टस का इस्तेमाल किया है। जो लाईट सिनेमा में इस्तेमाल होती हैं पहली बार इस नाटक में उसी लाइट का इस्तेमाल हो रहा है। यह एक्सप्रियेंस देखने के लायक होगा कि स्टेज पर किस तरह चीजें हवा में उड़ रही हैं। किस तरह अपने आप ही चीजें गायब हो रही हैं, किस तरह से दरवाजा खुद ही खुलता है। यह सब अगर पर्दे की जगह सामने लाईव होगा तो डर तो लगेगा ही ना।

निर्देशक नाटक की थीम के बारे में बताते हैं। यह नाटक हॉरर थ्रिलर है, जिसमें ड़र तो लगता है लेकिन एक अच्छा मेसेज भी है। हम ड़र के चलते बहुत सारी चीजों को समझ ही नहीं पाते हैं। हम चीजों से पहले ही ड़रकर उन्हें कुछ ना कुछ मान लेते हैं और उस से ड़रते रहते हैं। हम उस ड़र के पार ही नहीं जाना चाहते हैं जबकि असल सच्चाई ड़र के पार होती है।

ओवी एक बच्ची है, जिसके मां बाप मर चुके हैं। वह अपनी दादी के पास जाती है तो कुछ दिन बाद उसकी दादी भी मर जाती है। उसका चाचा जब उसे अनाथ आश्रम में छोड़ आता है तो वहां की वार्डन उसकी जिम्मेदारी लेती है। ओवी को एक कमरा अलोट हो जाता है और यहीं से ओवी का सफर शुरू होता है जो दर्शकों को डराते हुए, हसाते हुए एक नतीजे पर पहुंचता है और देखने वालों के दिल को छू लेता है।

कब: सितम्बर 7 और 8 सितम्बर
कहां: कमानी ओडीटोरियम दिल्ली