सूरजकुंड मेले के बारे में दिल्ली वाले तो जानते ही हैं। दिल्ली से बाहर के लोगों की जानकारी के लिए बताना ज़रूरी है कि सूरजकुंड एक ऐतिहासिक जगह है।

सूरजकुंड यानि 6 एकड़ में एक तालाब है, जिसमें सूरज डूबता है। इसका संबंध 10वीं शताब्दी के तोमर वंश से लेकर तुगलक वंशजों से है। इसी कुंड के ठीक पास  में 1987 में पहली बार भारतीय हस्तशिल्प कला को प्रोत्साहन देने के लिए सूरज कुंड मेले का आयोजन किया गया। इस साल 14 फरवरी से इसका 33वीं आयोजन शुरु हो चुका है जो 17 फरवरी तक चलेगा।

surajkund mela
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इस साल के सूरजकुंड मेले की थीम के तोर पर महाराष्ट्र राज्य  को चुना गया है और भागीदारी देश थाईलेंड़ है। देश और दुनिया भर से हज़ारों की तादाद में हाथ से बना सामान  लेकर लोग इस मेले में पहुंचते हैं। कलाकारी और कारगरी का इस से बेहतर सामान आपको शायद ही कहीं मिले।

आप खरीद सकते हैं: होम फर्निशिंग और सजावट के सामान: लकड़ी से बने घरेलू सामान, पेंटिंग  मधुबनी, पत्ती चित्र (पेंटकारी), बांस की पेंटिंग, कश्मीरी, अफ़ग़ानिस्तान और कई जगहों की बनी कालीन, लैंप, चमड़े और कागज के दीवार पर लटकने वाले सामान, रसोई के बर्तन टेबलवेयर हथकरघा और वस्त्र: शॉल, साड़ी, जैकेट, शर्दियों के कपडे, महिलाओं के कपड़े आदि।

आप देख-सुन सकते हैं: सांस्कृतिक कार्यक्रम में आप  इस बार भोजपुरी गायिका मालिनी अवस्थी और प्रसिद्ध हास्य कलाकार सुरेंद्र शर्मा, रॉक संगीत कार्यक्रम, शास्त्रीय संगीत प्रदर्शन, कविता पाठ ऐसे कई और भी कार्यक्रम सुन सकते हैं.

कब: 14 से  17 फरवरवी, रोज़ सुबह 10 बजे से

कहां: लेकवुड़ सिटी, सूरज़ कुंड़, फरीदाबाद