एनाबेल कम्स होम 28 जून को सिनेमा घरो में रिलीज हो रही है। एनाबेल सिरीज की यह तीसरी और आखिरी फ़िल्म हैं। इस फ़िल्म से पहले एनाबेल सिरीज की दो फ़िल्में आ चुकी हैं। उन दोनों ही फ़िल्मों ने लोगों को काफी ड़राया और पैसा भी कमाया। यह सिरीज हॉलीवुड की सबसे ज़्यादा डराने वाली सिरीज में से एक मानी जाती है।

एनाबेल की फ़िल्मी कहानी: एक औरत अपनी मेडीकल की स्टूडेंट बेटी के बर्थ डे पर उसे एक अलग सी दिखने वाली गुडिया गिफ्ट करती है। गुडिया के घर में आने के बाद लेकिन कुछ अजीबो गरीब सी हरकतें होने लगती हैं। घर का सामान खुद से ही इधर उधर होने लगता है। घरवाले गुडिया को ऑबजर्व करते हैं तो पाते हैं कि उसके अंदर किसी की आत्मा है। गुडिया पहले झूंठ बोलकर उन्हें फसाती है कि उसके अंदर एक बच्ची की आत्मा है और वो सिर्फ डोना के साथ खेलना चाहती हैं। घरवालों को पैरानॉर्मल एक्सपर्ट की टीम से पता चलता है कि वह कोई मामूली गुडिया नहीं एक शापित गुडिया है। उसके अंदर शैतान है। जो उनकी बेटी को छोडना नहीं चाहता है।

एनाबेल गुडिया का रहस्य

कुछ लोगों की माने तो एनाबेल नामक गुडिया आज भी Warren’s Occult Museum में शीशे के बॉक्स रखी हुई है। बॉक्स के उपर एक चेतावनी लिखी हुई है। गलती से भी इस बॉक्स को ना खोलें। इसे खोलना जालेवा हो सकता है। एनाबेल की गुडिया को लेकर अलग-अलग तरह की बहुत सी कहानियां हैं। हो सकता है यह भी एक कहानी हो। लेकिन सभी कहानियां फ़िल्म की कहानी से क्यों मिलती जुलती हैं?

Annabelle comes home

जॉनी ग्रुएल जिनकी कलम से एनाबेल ने जन्म लिया

जॉनी ग्रुएल एक जाने माने अमेरिकी लेखक थे। उनका जन्म 1880 में हुआ, वह 1938 में दुनिया से विदा हुए।  वह कार्टून बुक्स, राजनेतिक कार्टून और बच्चों के लिए कहानियां लिखा करते थे। जॉनी की ही कलम से ही रेजेडी एनाबेल का जन्म हुआ था। उन्होंने ही सबसे पहले 1918 में बच्चों के लिए रेजेडी अन्ना एण्ड रेजेडी एन्डी डॉल नामक कहानी की सीरीज लिखी थी।

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ऐसा  कहा जाता है कि एनाबेल रेजेडी का आईडिया उन्हें अपनी बेटी को देखकर आया था। उन दिनों वह जब बच्चों के लिए कुछ कहानी लिखने की कोशिश कर रहे थे। उनकी बेटी के पास एक गुडिया थी जिस से वह खेला करती थी। कुछ दिनों के बाद संक्रमण के टीके के कारण उनकी बेटी की मृत्यु हो गई थी।

एनाबेल जैसी कहानियों का सच

एनाबेल फ़िल्म चाहे बहुत बाद में बनी हो, इस तरह की कहानियां लेकिन हर देश की दंतकथाओं में मिल जाती हैं। अरब की कितनी कहानियों में पाया गया है कि किसी इंसान की जान पुतले में रहती है। भारतीय कहानियों में तो इसकी भरमार है। यहूदियों और मिस्र के लोगों में भी इस तरह की कहानियों को मान्यता दी जाती रही हैं। एक इंसान अपनी जान किसी पुतले में रखता है। ऐसी कहानियां लगभग सभी देशों की दंतकथाओ में मिल जायेंगी।

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लेखक ने ही किया निर्देशन

एनाबेल कम्स होम में एनाबेल पैरानॉर्मल एक्सपर्ट की टीम के साथ में होगी। इस सीरीज की तीसरी और आखिरी फ़िल्म का निर्देशन गैरी डॉबरमैन ने किया है। गैरी डॉबरमैन इस पहले आ चुकीं एनाबेल सीरीज के लेखक हैं। वह इस फ़िल्म से अपना निर्देशन करियर शुरू करेंगे।

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