किसी भी फ़िल्म और किताब का उसके नाम से ही पता लग जाता है। कुछ फ़िल्में हिन्दी सिनेमा में ऐसी हैं, जिनके नाम सुनकर या तो आप हसोगे या फिर आप कुछ और सोचने लगोगे। इन फ़िल्मोंं को देखने के बाद लेकिन आपको पता लगेगा। यह फ़िल्में अपने नाम से कितनी अलग हैं। इन फ़िल्मों की कहानियां इन फ़िल्मों के गीत तो छोड़िये इन फ़िल्मों के नाम ही आपका दिल जीत लेंगे।

अंधेरी रात में दिया तेरे हाथ में

इस फ़िल्म को दादा कोंडके ने बनाया है।दादा कोंडके अपनी फ़िल्मों के नामों के लिए मशहूर थे।

andheri raat main
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खोल दे मेरी…जुबान

यह फ़िल्म भी दादा कोंडके ने बनायी है। इस फ़िल्म को देखकर आपको हसी आयेगी और अंत में रोना भी आ जायेगा।

Khol de meri Zubaan
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आगे की सोच

इस फ़िल्म में दादा कोंडके हैं, फ़िल्म का नाम ही आगे की सोच है।

AAGE KI SOCH
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तेरे मेरे बीच में

इस फ़िल्म को देखोगे तो बहुत हसोगे और हसते ही जाओगे।

Tere-Mere-Beech-Mein
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सुलेमानी कीड़ा

इस फ़िल्म का नाम सुलेमानी कीड़ा है, फ़िल्म दो लेखकों की कहानी है।फ़िल्म में सुलेमानी कीड़े का मतलब कुछ और है।

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सस्ती दुल्हन मंहगा दूल्हा

इस फ़िल्म के नाम पर मत जाना, फ़िल्म में आदित्य पंचोली के साथ और बड़े सितारों ने काम किया है।

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बंदूक दहेज के सीने पर

शशि कपूर इस फ़िल्म में हैं, फ़िल्म एक समाजिक बुराई पर तंज करती है।

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तु बाल ब्रह्मचारी मैं हूं कन्या कुमारी

बाल ब्रह्मचारी फ़िल्म हिन्दी बहुत ही अच्छी फ़िल्म है। उस फ़िल्म में और इस फ़िल्म में क्या फर्क़ है, देखकर ही पता लगेगा।

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बढ़ती का नाम दाढ़ी

इस फ़िल्म का नाम सुनकर ही आपको हसी आ रही होगी, देखेंगे तो पता चलेगा।

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धोती लोटा और चोपाटी

इस फ़िल्म में बड़े-बड़े स्टार हैंं, फ़िल्म को देखने पर असलियत पता चलेगी।

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ऐसी कितनी फ़िल्में हैं, जिनके हमें किरदार याद रह जाते है।ऐसी कितनी फ़िल्में हैं, जिनके गाने हमें याद रह जाते हैं।लेकिन यह कुछ ऐसी फ़िल्में हैं, इनके नाम ही आपको याद रह जायेंगे।