मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर  फ़िल्म 15 मार्च को  रिलीज हो रही है। फ़िल्म का ट्रेलर बहुत पहले ही रिलीज हो चुका है। फ़िल्म का ट्रेलर देखकर ही लगता है कि यह फ़िल्म किसी गम्भीर समस्या की तरफ इशारा करती है। फ़िल्म के ट्रेलर में किरदारों के कुछ डॉयलॉग से पता चलता है कि कुछ तो ऐसा हुआ है, जिस का इंसाफ मिला नहीं मिला, जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चे सीधे प्राइम मिनिस्टर से  इंसाफ मांगने चल दिये। इस फ़िल्म का ट्रेलर देखने के बाद बच्चों के जीवन पर बनी इन लाज़वाब  फ़िल्मों की याद आती है।

‘गट्टू'(2012)

यह एक अपाहिज बच्चे की कहानी है। यह बच्चा पढ़ा लिखा नहीं है, लेकिन पतंग उड़ाने के चक्कर में स्कूल जाने लगता है। यह फ़िल्म पढ़े लिखे समाज पर गहरी चोट करती है। फ़िल्म का बज़ट भी बहुत कम था। इस फ़िल्म को लेकिन क्रिटीक ने काफी पसंद किया था।

Mere Pyare Prime Minister

‘चिल्लर पार्टी'(2011)

यह फ़िल्म अमीर सोसायटी के बच्चे और एक गरीब बच्चे के बीच की कहानी है। गरीब बच्चे के पास एक कुत्ता है जिसके लिए सारे बच्चे एक नेता से लड़ जाते हैं। इस फ़िल्म को लोगों ने बहुत ही ज़्यादा पसंद किया था। इस फ़िल्म के बाद सोसायटी में रहने वाले बच्चों का नज़रिया गरीब बच्चों के लिए एक दम बदल गया था।

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‘स्टेनली का डब्बा'(2011)

यह भी कुछ अमीर बच्चों के बीच में एक गरीब बच्चे की कहानी है। एक बच्चा गरीब है और स्कूल में पढ़ने के लिए आ जाता है। स्टेनली अपना डब्बा उसे खिलाता है। स्टेनली का टीचर खाने का शोकीन है और वह बच्चो का टिफिन खाता है। स्टेनली के डब्बे में जब उसे खाना नहीं मिलता तो वह बच्चों से नाराज़ हो जाता है।  फ़िल्म बच्चे वर्सेज टीचर बन जाती है।

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‘आई एम कलाम’ (2011)

इस फ़िल्म की थीम भी लगभग कुछ वैसी ही है। एक बच्चा राष्ट्रपति के नाम से प्रभावित हो जाता है। वह राष्ट्रपति कलाम से मिलना चाहता है। इस फ़िल्म को बेस्ट चाइल्ड़ एक्टर का नेशनल अवार्ड मिला था। फ़िल्म कांन्स फ़िल्म फैस्टीवल से लेकर गोवा फ़िल्म फेस्टीवल तक कई देशी विदेशी फेस्टीवल में दिखाई गई थी।

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तारे ज़मीन पर(2007)

यह फ़िल्म एक ऐसे बच्चे की कहानी है। जिसे डिस्लेकिसिया होता है। उसके घरवाले उसकी परेशानी को समझ ही नहीं पाते है। एक टीचर उसकी इस बिमारी को समझता है और उसके घरवालों को समझाता है। इस फ़िल्म को क्रिटीक से ने काफी पसंद किया था। फ़िल्म ने कारोबार भी अच्छा किया था।

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‘सलाम बॉम्बे'(1988)

यह फ़िल्म एक ऐसे बच्चे की कहानी है, जो किसी तरह से मुम्बई जैसे शहर मे ंफस गया है। वह सारी उम्र लगा देता है लेकिन शहर से निकल नहीं पाता है। भारत में यथार्थवादी सिनेमा की शुरूवात में इस फ़िल्म का भी योगदान माना जाता है। इस फ़िल्म को इंडिया की तरफ से ऑस्कर के लिए भेजा गया था।

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मेरे प्यारे प्राईम मिनिस्टर 15 मार्च को रिलीज होने वाली है। इस फ़िल्म से भी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। यह फ़िल्म भी बच्चों पर बनीं इन्हीं फ़िल्मों की तरह होगी। यह फ़िल्म भी अगर इन्हीं फ़िल्मों की तरह ही निकली तो यह फ़िल्म भी काफी नाम कमा सकती है।