क्राइम, थ्रिलर और इमोशन
80%Overall Score

डिजिटल प्लेटफार्म पर हिन्दी फ़िल्म और सीरीज के लिए बीता हफ्ता काफी अच्छा साबित हुआ। पिछले हफ्ते हिन्दी की कई सारी फ़िल्में और सीरीज चमन बहार, पैंगुइन, योर ऑनर  रिलीज हुई हैं। इनमे से ज़्यादातर सभी फ़िल्मों और सीरीज के रिव्यू अच्छे रहे हैं। पिछले हफ्ते ही हॉट स्टार पर 9 एपीसोड की हिन्दी सीरीज आर्या रिलीज हुई। सीरीज कैसी है जानने के लिए रिव्यू देख सकते हैं.

निर्देशक: राम माधवानी, संदीप मोदी, विनोद रावत
कलाकार: राम माधवानी, संदीप मोदी
प्लेटफार्म: सुष्मिता सेन, चंद्रचूर सिंह जगदीश राजपुरोहित, मनीस चौधरी, अंकुर भाटिया, सिकंदर खेर, नमित दास

कहानी कोई नई नहीं है। कहानी का वातावरण यानी राजस्थान में जहां फिल्मायी गई है उसमें भी कोई नई बात नहीं है लेकिन कहानी जिस तरह से दिखाई गई है वो अंदाज नया है। महाभारत जिसने देखी पढ़ी है उसे कहानी को समझने में थोड़ी आसानी होगी।

आर्या की कहानी एक आधुनिक शक्तिशाली भारतीय महिला के सशक्तिकरण को दर्शाती है। आर्या (सुष्मिता सेन) दरअसल एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती है जिसमें हत्या, गैरक़ानूनी धंधे आम बात हैं। आर्या के पिता एक बहुत बडे डॉन हैं जो अफीम की खेती से लेकर ड्रग डीलिंग का काम करते हैं। आर्या का पति तेज सरीन (चंद्रचूर सिंह) आर्या के भाई संग्राम (अंकुर भाटिया) और ज्वाहर (नमित दास) के साथ मिलकर अफ़ीम से नशीली दवा बनाने का कारोबार करता है।

एक और डॉन शेखावत (मनीष चौधरी) ख़तरनाक रसियन लोगों के साथ मिलकर ड्रग डीलिंग करता हैं। सीरीज का ड्रामेटिक पोइंट यहीं से मिलता है। आर्या का भाई संग्राम डॉन शेखावत का तीन सौ करोड़ का माल चुरा लेता है। संग्राम उस माल को अपनी कम्पनी के जरिये बेचना चाहता है लेकिन आर्या का पति तेज इस काम को करने से मना कर देता है।

इसी बात को लेकर तेज का अपने पार्टनरों के साथ झगड़ा हो जाता है। इसी बीच रहस्मयी तरीके से कोई तेज की गोली मारकर हत्या कर देता है। तेज मरने से पहले नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अफसर ख़ान (विकास कुमार) से डील करता है कि खान उसके परिवार को सुरक्षित न्यूजीलैंड भिजवाये बदले में वो उसे एक पेन ड्राइव देगा जिसमें काले धंधों की सारी लिस्ट है। यहीं से आर्या और उसके परिवार की खुशहाल ज़िंदगी मुसीबतों में बदल जाती है।

आर्या के पहले सीजन में 9 एपीसोड हैं। इसमें बहुत सारे सब प्लॉट चल रहे हैं। आर्या की मां और उसके पिता के बीच सबंध अच्छे नहीं है। आर्या को अपने पति की मौत का शक उसके करीबी दोस्तों पर है। वह सच पता लगाने की कोशिश कर रही है। आर्या का बेटा जिस लड़की को डेट कर रहा है कोई उसे ब्लैकमेल करके उस से वो पेन ड्राइव चुरवाना चाहता है। आर्या की 14 साल की बेटी रसियन मूल के अपने ही मौसा से प्यार करने लगती है। आर्या का छोटा बेटा पिता की मौत के बाद मोटर साइकिल की आवाज सुनकर ही डर जाता है। आर्या के पति के जितने भी अकाऊंट थे सब सीज हैं। उसकी ब्लैकमनी उसके भरोसे के लोग नहीं लोटा रहे हैं। उसका घर मकान सब बैंक के पास गिरवी रखा हुआ है। शेखावत जैसा ड्रग माफिया उस से ड्रग सप्लाई कराकर अपने तीन सौ करोड़ का नुकसान वसूलना चाहता है। नार्कोटिक्स ऑफिसर ख़ान हाथ धोकर आर्या के पीछे पड़ा हुआ है।

आर्या की जिंदगी में इतना सब कुछ चल रहा है। आर्या एक तरफ अपने परिवार को बचा रही है और दूसरी तरफ अपने पति के क़ातिल की तलाश में है। आर्या को जब अपने पति के कातिल के बारे में पता चलता है तो उसके होश उड़ जाते हैं। आर्या के साथ-साथ दर्शकों के भी होश उड जाते हैं।

सिनेमा की नज़र से

हिन्दी वेब सीरीज का इतिहास बहुत ज़्यादा पुराना नहीं है। कुछ साल पहले तक बहुत ज़्यादा लोगों का ध्यान इस तरफ नहीं था। अब कुछ सालों में बड़े-बड़े एक्टर प्रोडयूसर इसमें कूद पड़े हैं। इंडिया में अब तक जितनी सीरीज कामयाब हुई हैं वो या तो किसी किताब पर आधारित हैं या फिर किसी विदेशी सीरीज का एडेप्टेशन हैं।

अब से 10 साल पहले स्पेनिश भाषा में एक सीरीज पेनोजा की शुरूवात हुई थीउस सीरीज के 5 सीजन आ चुके हैं। आर्या उसी स्पेनिश सीरीज का हिन्दी एडेप्टेशन है। यह एडेप्टेशन हिन्दी में कितना फिट बैठता है उस पर कुछ सवाल हो सकते हैं। एक तो यह कि लेखक ने राजस्थान में ही एडेप्टेशन क्यों किया और क्या राजस्थान कहानी के हिसाब से हिट बैठता है।

राम माधवानी एक मंझे हुए निर्देशक हैं। यह उन्होंने आर्या में एक बार फिर साबित कर दिया। फ़िल्म नीरजा में भी उन्होंने अपनी नायिका को फालतू के हीरोइज़्म से बचाये रखा था इस सीरीज में भी उन्होंने आर्या को बचाये रखा है हालांकि इस सीरीज में उनके साथ दो निर्देशक संदीप मोदी और विनोद रावत और हैं। सीरीज का कौन सा हिस्सा किसने शूट किया है यह अलग बात हो सकती है।

निर्देशक ही जब लेखक भी होता है तो जिम्मेदारी और बढ़ जाती हैं। आर्या के पहले एपीसोड में ही तेज की हत्या होती है। इस हत्या को निर्देशक चाहता तो वहीं क्लोज कर देता लेकिन उसने अंत तक इसे सीरीज का इमोशनल पोइंट बनाये रखा। एक आदमी जब अचानक हमारे बीच से चला जाता है कितने लोगों पर उसका किस-किस तरह से असर पड़ता है। निर्देशक ने इस भावुक पोइंट से अंत तक दर्शकों को इमोशनल किया है।

कहानी का मुख़्य प्लॉट आर्या को तेज के हत्यारों का पता लगाना है। इसके अलावा कुछ सब प्लाट चल रहे हैं जो कहीं भी सीरीज का मजा ख़त्म नहीं होने देते हैं। हिन्दी सीरीज के लेखक अकसर प्लाट और सब प्लाट के बीच ही ज़्यादा फसते हैं। आर्या के लेखक और निर्देशक ने लेकिन जिस तरह मुख़्य प्लाट के साथ जोड़कर सब प्लाट ख़त्म किये हैं उस से अंत में दर्शक खुद को ठगा हुआ महसूस नहीं करता है।

हिन्दी सीरीज में महिला प्रोटागोनिस्ट हैं तो सही पर कम हैं। सीरीज में कुछ सीन ऐसे हैं जो हिन्दी में पहले कम ही देखने को मिले होंगे। एक सीन में शेखावत का गुंडा आर्या की बेटी अरू को किडनेप करके ले जाता है। अरू के मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं। अरू जिसकी कैद में है उसी गुंडे से सेनेटरी नेपकिन मंगवाती है और वो गुंड़ा स्टोर से लेकर आता है। ऐसा ही एक सीन और है जिसमें आर्या की बेटी और बेटा दोनों आर्या के लिए चाय बनाना चाहते हैं। आर्या अपनी बेटी की जगह अपने बेटे को चाय बनाने के लिए बोलती है।

आर्या के निर्देशक और लेखक ने बीच-बीच में महाभारत का रेफरेंस दिया है। सीरीज के अंत में एक तरफ स्टेज पर महाभारत का नाटक चल रहा है और दूसरी तरफ सारे किरदारों के राज खुल रहे हैं। दर्शकों को भी साफ नज़र आने लगता है कि सीरीज का कौन सा किरदार महाभारत के किस किरदार का रूप है और आर्या को हम वहीं खड़ा पाते हैं जहां महाभारत में अर्जुन को खड़ा पाते हैं। आर्या खुद से वही सवाल कर रही है जो महाभारत के मैदान में अपने सगे सबंधियों को देख अर्जुन कृष्ण से करता है। यह कमाल का लेखन और निर्देशन है।

आर्या में हाई क्लास का रहन सहन दिखाया गया है। सुष्मिता सेन आर्या के किरदार में एक दम फिट बैठती हैं। इस रोल में उन्हें देखकर हर किसी को आश्चर्य हो सकता है कि इतने दिनों बाद उन्होंने दमदार एक्टिंग के साथ में वापसी की है। चंद्रचूर सिंह की जैसी इमेज है उसके हिसाब से उन्हें बहुत सही कास्ट किया गया है। वह जब-जब स्क्रीन पर आते हैं इमोशनल कर जाते हैं। सहायक किरदारों में नमित दास ने जो एक्टिंग की है उससे लगता है कि बहुत कुछ रियल में चल रहा है। एक ड्रग एडिक्ट किस तरह से सोचता है और किस तरह रियेक्ट करता है उन्होंने बखूबी अपनी अदाकारी से दिखाया है।

हर किरदार को अच्छे से इस्तेमाल किया गया है। हर छोटे-बडे किरदार ने अपना काम अच्छे से निभाया है। लेखक ने किसी भी किरदार को डमी की तरह इस्तेमाल नहीं किया है। हर किरदार सीरीज की कहानी को आगे बढ़ा रहा है और इंटरेस्ट पैदा कर रहा है।

कुछ बातें लेकिन सवाल पैदा कर देती हैं। आर्या की बेटी बोल-चाल में हिन्दी इस्तेमाल कम ही कर रही है लेकिन हिन्दी के बहुत भारी शब्दों में कविता लिख रही है। यह भी हो सकता है लेकिन एक रसियन आदमी उन भारी शब्दों को समझा रहा है यह भी हो सकता है। आर्या राजस्थान में बेस्ड हैं लेकिन राजस्थान जैसा कुछ दिख नहीं रहा है  कल्चर विदेशी लग रहा है। यह भी होने को तो हो सकता है लेकिन कहीं ना कहीं मन में खलता है।

आर्या के 9 एपीसोड में पुराने सदाबाहर गानों पर बहुत जोर दिया गया है। पहले एपीसोड से ही पुराने गानों का अच्छा इस्तेमाल किया गया है। यह गाने कहानी में भी एक दम फिट बैठ रहे है- आर्या के रूंठने पर इस गाने का रिकार्ड चलना- एहसान तेरा होगा मुझ पर, आर्या की बेटी घर से जा रही है वह अपने पापा की फैवरेट गाना वीडियों में सुन रही है ‘अकेले अकेले कहां जा रहे हो’। ‘बड़े अच्छे लगते हो’  इन गानों का जितनी अच्छी तरह से आर्या में इस्तेमाल किया गया ऐसा इस से पहले बहुत कम देखने को मिला है। इस सीरीज में गानों को सुनकर आपको लगता है कि जैसे पुराने गानों को नई सिचुएशन पर दोबारा फिल्मा दिया गया है। ओल्ड़ और न्यू का तालमेल सुनने और देखने वालों को नया एहसास कराता है।

कोई क्यों देख

सुष्मिता सेन को फ़िल्मों में जिन्होंने नायिका के रूप में मेरा बच्चा, मेरा बेबी, जैसे संवाद बोलते सुना है। वह सुष्मिता सेन को नये अंदाज मे देख सकते हैं।

हिन्दी भाषा में जो लोग किसी अच्छी सीरीज के आने का इंतजार कर रहे थे। जिसमें सस्पेंस हो, क्राइम हो, थ्रिलर हो और कुछ नया हो जो किसी हॉलीवुड की सीरीज की तरफ बांधे रखे तो देख सकते हैं।

यह सीरीज राजस्थान में बेस्ड है लेकिन अगर आप इसमें राजस्थानी भाषा और वहां का कल्चर खोजने लगे तो आपको निराशा हो सकती है।