कहानी पहली जॉब की
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MX Player पर पांच एपीसोड की एक छोटी सी सीरीज बेसमेंट कम्पनी रिलीज हुई है। इस सीरीज को ऑफिस में काम करने वालों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। सीरीज में हल्की फुल्की सी कॉमेडी है जो बीच-बीच में आपको हसने का मौका देती है। सीरीज कैसी है जानने के लिए देख सकते हैं।

निर्देशक: दिव्यांसु मल्होत्रा
कलाकार: मयूर मोरे, गगन अरोरा, अपरूवा अरोरा।
सीजन: 1
प्लेटफार्म: MX Player

कहानी एक ऑफिस की हैं जहां कुछ नये लोगों का हायर किया जाता है। आप ऑफिस की हालत और  वहां के लोगों की बातें सुनकर पहले पांच मिनट में ही समझ जायेंगे कि निर्देशक और लेखक का मकसद सिर्फ आपको हंसाना है और गुदगुदाना है।

यह एक ऐसी कम्पनी की कहानी है जिसमें राहुल (मयूर मोरे) राज (गगन अरोरा) सिमरन (अपरूवा अरोरा) को हायर किया जाता है लेकिन कम्पनी में उनके काम करने के लिए जगह नहीं है। उन्हें काम करने के लिए बेसमेंट में जगह दी जाती है जबकि यह उनकी पहली जॉब है।

यह लोग जब उस जगह को देखते हैं तो वहां कूड़ा करकट भरा पड़ा है। पाइप से पानी टपक रहा है। यह तीनों लोग पहले तो परेशान होते हैं फिर किसी तरह से उस कूडे करकट को साफ करते हैं और उस जगह को रहने लायक बनाते हैं। इसके अलावा इन लोगो का बोस जो बहुत ही अटपटा सा है। उस से कोई भी फेवर कराना मुशकिल ही नहीं नामुमकिन भी है।

कम्पनी में पहले से मौजूद काम करने वालों में कम्पनी की एच.आर और ऑफिस ब्वाय दोनों ही बड़े अतरंगी हैं जिनकी बातें सुनकर आपको लगेगा कि सीरीज का मकसद सिर्फ हंसाना और गुदगुदाना है।

सिनेमा की नज़र से

बेसमेंट कम्पनी बहुत ज़्यादा सीरियस नहीं करती है हालांकि बीच-बीच में कुछ बहुत ही काम की बातें भी कर जाती है। आप अगर किसी ऑफिस में काम करते हैं तो बहुत सारे सीन देखकर यह जानते हुए भी आपको मजा आयेगा कि जो कुछ चल रहा है वो सच नहीं है।

बेसमेंट कम्पनी के निर्देशक दिव्यांसु मल्होत्रा क्योंकि टी.वी.एफ की कई सारी सीरीज में किसी ना किसी रूप में जुड़े रहे हैं। इस सीरीज पर भी इसलिए टी.वी.एफ जैसे कंटेंट की छाप दिखती है। दिव्यांसु मल्होत्रा इस से पहले ऑफिस-ऑफिस, ये मेरी फैमली, बिष्ट प्लीज, इन मेट्स, आई एम मेच्योर जैसी सीरीज से किसी ना किसी तरह जुड़े रहे हैं। यह सीरीज का कंटेट भी कुछ-कुछ उसी तरह का है। निर्देशक ने सीरीज के जरिये जिस तरह अपना अंदाज ए बयां किया है उस हिसाब से सीरीज एवरेज है।

सीरीज को अगर तकनीकी तौर भी देखें तो यह एक कम्पनी के बेसमेंट पर आधारित है। इसलिए ज़्यादातर इंडोर ही शूट किया गया है। एक ही तरह की लोकेशन है बहुत ज़्यादा लोकेशन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इस सीरीज का कैमरा देखकर ही लगता है कि सीरीज को बनाने में किसी तरह की कमी नहीं रही होगी।

मयूर मोरे इस से पहले गर्ळफ्रेंड चोर सिरीज में दिखाई दिये थे। उस सीरीज में उन्होंने अच्छा काम किया था इस सीरीज में भी उन्होंने सही काम किया है। गगन अरोरा ने भी उनका सही साथ दिया है। इसके अलावा कुछ किरदार सिर्फ ड्रामा भी करते देखे जा सकते हैं।

बेसमेंट कम्पनी के लेखक परिजात जोशी और तरूण दुदेजा दोनों ही इस से पहले काफी कुछ लिख चुके हैं। निर्देशन में काम कर चुके हैं। इस सीरीज में उनका वो तजुर्बा साफ दिखाई देता है। सीरीज हालांकि बहुत ज़्यादा सीरियस मुद्दों पर बात नहीं करती है।

कोई क्यों देखे

सीरीज का कंटेंट मजेदार है। यह ना बहुत ज़्यादा हंसाती है और ना ही बहुत ज़्यादा सीरियस करती है। सीरीज देखने के बाद ना आपको लगेगा कि बहुत कुछ ज्ञान हासिल हो गया और ना ही आपको लगेगा कि आपका बहुत कीमती समय खराब हो गया।

इस समय आदमी जब ऑफिस नहीं जा पा रहा है अपने घर पर ही रहकर काम कर रहा है तब ऑफिस की याद में सीरीज देखी जा सकती है।