प्यार साजिश और धोखा
45%Overall Score

बेबाकी दस एपिसोड के साथ रिलीज हुई है। सीरीज का कंटेंट आल्ट बाला जी और जी5 की बाकी सीरीज के जैसा ही है। दर्शकों को समझने में बहुत देर नहीं लगती है कि दस एपिसोड में सीरीज की कहानी किस मकाम तक पहुंचेगी। पहला सीरीज को कितनी गम्भीरता से देखना है देखने वाला पहले एपिसोड़ के बाद ही मन बना लेता है।

कहानी सुफियान(कुशाल टंडन) से शुरू होती है। सुफियान अपने घराने का सबसे पुराना कारोबार मीडिया हाऊस देखता है। वह अपनी कम्पनी की डिजिटल साईट लॉंच करना चाहता है। जिसे वो किसी मंत्री के अफेयर की सनसनी खेज न्यूज से लॉंच करना चाहता है। एक रात हॉटल में वो किसी लड़की के साथ होता है कि एक लड़की कायनात(शिवज्योति राजपूत) से उसका फोन बदल जाता है।

फोन जिस से बदलता है इत्तेफाक से वो कायनात भी एक जर्नलिस्ट होती है। इत्तेफाक से ही वह जिस मीडिया हाऊस में  काम करती है। वह भी उस स्टोरी के पीछे हैं जिस से सुफियान अपना डिजिटल चैनल लांच करना चाहता है।  सुफियान के सारे मैसेज कायनात के पास पहुंचते हैं। कायनात उन मैसेज के दम पर स्टोरी अपने चैनल को दे देती है। सुफियान कायनात की कम्पनी को ही खरीद लेता है और कायनात को जोब से निकाल देता है।

कायनात सुफियान के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल देती है। सुफियान और कायनात के बीच यहीं से एक फाईट शुरू होती है। इस कहानी में दो एपिसोड के बाद सुफियान का भाई इम्तियाज(करन जोटवानी) भी आ जाता है। कायनात की इम्तियाज से दोस्ती बढ़ती जाती है और सुफियान से दुश्मनी बढ़ती जाती है। कायनात की वज़ह से दोनों भाईयों के बीच फैमली ड्रामा भी शुरू हो जाता है। सुफियान के दो छोटे भाई और उसके दोस्त एक बार पहले तो कायनात को रास्ते में छेड़ते हैं। एक बार उसके पिता जी को चीट करते हैं। यानि सुफियान अब्दुल्लाह की फैमली जो भी कर रही है। वह इत्तेफाकन कायनात से किसी ना किसी तरह कनेक्ट हो ही जाता है। इस ड्रामें में कायनात किसकी होगी । वह देखोगे तो पता चलेगा।

सिनेमा की नज़र से

किसी भी फ़िल्म की लेखनी उसकी असली जान होती है। लेखनी ही जब कमजोर होगी तो निर्देशक बेचारा कहां तक क्या करेगा। सीरीज को देखने पर ऐसा लगता है। सीरीज के चार लेखकों ने जबर्दस्ती सुफियान को कायनात से मिलाने की कोशिश की है। मिलाने के लिए भी इतना घिसा पिटा आईडिया इस्तेमाल किया है। एक लड़की का फोन एक लड़के से बदल जाता है। उस बहाने लड़का लड़की मिल जाते हैं। लेखकों ने किसी भी किरदार को ऐसा नहीं लिखा है कि देखने वाले उसे गम्भीरता से लें। कहानी में लेखकों की जरा भी मेहनत नहीं दिखती है। कायनात को जॉब से सुफियान निकालता है। उसके भाई के दोस्त उसे रास्ते में छेड़ते हैं। उसका एक भाई उसे बचाता है। उसके भाई उसके पापा के कॉलेज में पढ़ते हैं। वह एक दिन पेपर लीक कराने के लिए उन्हें फंसा देते हैं। यानी लेखक जब जब फंसता है तब तब आसान तरीका खोज़ लेता है।

हालांकि निर्देशक चाहे तो कहानी फ़िल्माने के अपने तरीके खोज सकता है। उसका सबसे पहला काम होता है। कहानी और माहौल के हिसाब से एक्टरों से एक्टिंग कराना। सीरीज मे वो चीज लेकिन कहीं भी नज़र नहीं आती है। फ़िल्म के बैकग्राऊंड में एक मीडिया घराना है। कोई भी किरदार किसी भी तरह से एक जर्नललिस्ट नहीं लगता है। कहानी को बिल्डअप करना होता है वो कहीं नहीं दिखता है।

इसके बाद अगर एक्टर चाहें तो अपनी एक्टिंग से भी माहौल बना सकते हैं। किसी भी एक्टर में वो दम नहीं दिखाई देता जो अपनी एक्टिंग के सहारे सीरीज को खींच ले जाये। सबके सब साफ नज़र आते हैं कि एक्टिंग कर रहे हैं। एक्टिंग भी ऑवर कर रहे हैं।

जो बाते हज़म नहीं होतीं

एक बहुत ही बड़ा जाना-माना मीडिया हाऊस चलाने वाले आदमी का अचानक से फोन बदल जाता है। उसे पता ही नहीं चलता। उसे पता भी लगता है तो वह सिम ब्लाक नहीं कराता उस पर मैसेज आते रहते हैं। वह मैसेज किसी दूसरे के पास जाते रहते हैं। ऊपर से वह किसी और के फोन पर बहुत ही कॉन्फिडेंशियल कॉल भी करता रहता है। मीडिया हाऊस चलाने वाले क्या वाकई इतने भोले होते हैं। एक जर्लनिस्ट अपने फोन के बदलने की कम्पलेन तो छोड़ो अपने नम्बर पर कॉल तक करके नहीं देखती। यह बात कुछ हज़म नहीं होती।

कोई क्यों देखे

सीरीज आल्ट बाला जी और जी5 के कुछ प्रसिद्ध सीरीज के जैसी है। फैमली ड्रामा है। टी.वी धारावाहिक जैसी लव स्टोरी है। परिवार के अंदर साजिशें हैं। यह सब चीजें अगर आपको पसंद हैं तो आराम से देख सकते हैं।

निर्देशक: मुज़म्मिल देसाई
लेखक: एकता कपूर, ब्रेडली फर्नांडिस, जया मिश्रा, अनुजा गोधालेकर।
कलाकार: कुशाल टंड़न, शिवज्योति राजपूत, करन जोटवानी, सुचित्रा पिल्लई, सोनाली राऊत
प्लेटफार्म: जी5