आज हम नेट पर दुनिया भर की फ़िल्में देख सकते हैं। कुछ दिनों पहले तक ऐसा नहीं था। इंडिया में नेशनल फ़िल्म आर्काइव (1964) के जनक पी.के नायर ने दुनिया भर में घूमकर फ़िल्मों के प्रिंट जमा किये थे। उस वक़्त उन्होंने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आयेगा। आदमी अपनी जगह से हिले बिना सारी दुनिया की फ़िल्में देख लेगा ।

इस समय इंडिया में भी बहुत सारे डिजिटल प्लेटफार्म हैं। जिन पर दुनिया भर की फ़िल्में मौजूद हैं। जिन्होंने सिनेमा के मायने ही बदल दिये हैं। आज बड़े-बड़े स्टार डिजिटल पर सीरीज कर रहे हैं। बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस इस में उतर चुके हैं। इसकी शुरूवात लेकिन बहुत पुरानी नहीं है। यह इंडिया की पहली सात सीरीज हैं जिनसे हिन्दी सीरीज की शुरूवात हुई थी। जिन्हें आप यूटयूब पर मुफ्त देख सकते हैं।

‘परमानेंट रूममेट्स’ (2014)

यह पहली एपीसोडिक सीरीज है। जिसे टी.वी.एफ ने बनाया था। इसमें आज की जेनेरेशन की सबसे बड़ी समस्या को दिखाया गया था। एक कपल शहर में किराये पर मकान लेना चाहता है। उसे किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हिन्दी फ़िल्मों और टी.वी धारावाहिकों से बोर हो चुके दर्शकों ने इस सीरीज को बहुत ही ज़्यादा पसंद किया। इस सीरीज के साथ ही डिज़ीटल पर एक नई शुरूवात हुई। यह आज भी यू.टयूब पर फ्री में देखी जा सकती है।

Permanent Roommates

‘पिचर्स’ (2015)

टी.वी.एफ ने ही और मेहनत करके अपनी अगली सीरीज पिचर्स बनायी। यह चार दोस्तों के स्टार्टअप की कहानी थी। इस तरह की कहानी इंडिया में बहुत कम लोगों ने देखी सुनी थीं। इस सीरीज को आई.टी, एम.बी.ए और हर स्टूडेंन्टस ने बहुत पसंद किया। इसी के साथ ही डिजिटल पर सीरीज का सिलसिला चल निकला। उस  समय बड़े-बड़े प्रोड़क्शन हाऊस की नज़र डिजिटल पर जाने लगी।

pitchers

‘बैंग बाजा बारात’ (2015)

यशराज फ़िल्मस ने बैंग बाजा बारात के ज़रिये यू टयूब पर दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश की। इसमें भारतीय समाज का को उस साईड से दिखाया गया जिसे हमने फ़िल्मों में कभी नहीं देखा था। इस सीरीज को काफी पसंद किया गया। यशराज फ़िल्मस के डिजिटल पर आते ही बॉलीवुड में होड सी मच गई।

bang baaja baaraat

‘मेन्स वर्ल्ड’ (2015)

यश राज की मेन्स वर्ल्ड सीरीज ने दर्शकों को एक नई कल्पना दी। इस सीरीज को देखने के बाद महिलाओं के मर्द महिला के दर्द को अच्छे समझ जायेगा। यह एक ऐसे ही लड़के की कहानी है, जो लड़की बन जाता है। इस सीरीज ने दर्शकों को हिन्दी फ़िल्मों और टी.वी से कुछ अलग सोचने के लिए उकसाया। इस सीरीज को भी बहुत सफलता मिली थी।

man's world

‘बेक्ड’ (2015-16)

इस सीरीज के साथ ही कंटेट की जानी-मानी कम्पनी स्कूपव्हूप ने भी यू टयूब पर अपनी शुरूवात की। इसकी कहानी दिल्ली के तीन दोस्तों पर आधारित थी। इसमें दिल्ली की स्टूडेंट लाइफ को दिखाने की कोशिश की गई थी। इसे अच्छी शुरूवात कही जा सकती है।

baked

‘लेडीज़ रूम’ (2016)

यशराज फ़िल्मस की सीरीज लेड़ीज रूम ने आज की वर्किंग महिला को दिखाने की कोशिश की थी। एक पढ़ी लिखी, बेफिक्र आजाद ख़्याल लडकियों की सोच को दिखाने की कोशिश की थी। यह सीरीज भी दर्शकों के बीच काफी सफल रही थी।

Ladies-Room

‘आई डोन्ट वॉच टी.वी’ (2016)

अरे ने आई डोन्ट वॉच टी.वी के साथ दर्शकों को हसाते-हसाते एक टी.वी स्टार की निज़ी ज़िंदगी को दिखाने की कोशिश की थी। टी.वी पर्दे पर जो देखते हैं उस के पार एक्टर की लाईफ में क्या-क्या होता है। इस सीरीज ने समझाने की कोशिश की थी। इस सीरीज के आने तक दर्शकों को नये कंटेट का चश्का लग चुका था।

i don't watch t.v

इस समय नेटफिलिक्स, अमेज़न प्राईम, जी5, आल्ट बालाजी, जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफार्म करोणों खर्च़ करके सीरीज बना रहे हैं। आज बेशक हमारे पास देखने को सीक्रेड़ गेम्स, मिर्जा पुर, मैड इन हेवेन जैसी बड़े स्केल की सीरीज हैं। लेकिन इन सीरीजों को हमेशा याद किया जायेगा। सिनेमा में नई दुनिया की नींव इन्होंने ही रखी थी।