एक बड़े दार्शनिक का कहना है कि अच्छी किताबें और अच्छे दोस्त हर किसी की जिंदगी पर प्रभाव ड़ालते हैं। हर किसी की ज़िंदगी में कुछ अच्छे और सच्चे दोस्त होते हैं। दोस्ती के मायने वक़्त, जगह, और कल्चर के हिसाब से बदलते भी रहते हैं। कुछ दोस्त हालातों को नहीं समझ पाते और दोस्ती में दरार हो जाती है। दोस्ती में एक दोस्त के क्या फर्ज़ होते हैं। एक दोस्त अपने दोस्त की ज़िंदगी में कहां तक दखलअंदाजी कर सकता है और कहां तक नहीं। यह फ़िल्में उस बात को अच्छे से समझाती हैं।

‘यारा’

यह चार दोस्तों की कहानी है। कहानी 70 के दशक पर आधारित है। जो तिग्मांशु धूलिया ने अमित साध, विद्युत जामवाल, मोहम्मद अली शाह को लेकर बनायी है। फ़िल्म फ्रेंडशिप डे के मौके पर 30 जुलाई को रिलीज हो रही है।साल: 2020
प्लेटफार्म: जी5

‘सोनू के टीटू की स्वीटी’

यह दो दोस्तों की कहानी है जिनमें एक बहुत भोला है और दूसरा बहुत चालाक है। भोला दोस्त एक लड़की के चक्कर में फंस जाता है और चालाक दोस्त अपने दोस्त को बचाने के लिए उस लड़की को बेनक़ाब करता है।
साल: 2018
प्लेटफार्म: अमेजन प्राइम

‘ए दिल है मुश्किल’

यह फ़िल्म एक लड़के और लड़की के बीच दोस्ती की जो सीमा होती है उसको बहुत अच्छे से समझाती है। एक दोस्त कब तक दोस्त रहता है और कब वो प्रेमी हो जाता है। फ़िल्म वही बताती है।
साल: 2016
प्लेटफार्म: अमेजन प्राइम

‘फुकरे’

इस फ़िल्म ने दोस्ती की अलग ही मिसाल पेश की थी। एक दोस्त सपना देखता है और दूसरा दोस्त उसका अर्थ बताता है। उसी सपने के आधार पर चार दोस्त पुलिस के चंगुल में फंस जाते हैं। फ़िल्म हंसाती है और दोस्ती का अर्थ भी समझाती है।
साल: 2013
प्लेटफार्म: अमेजन प्राइम

‘काई पो छे’

यह फ़िल्म सुशांत सिंह की शुरूआती फ़िल्मों में से है। फ़िल्म तीन दोस्तों की कहानी है जिसमें अलग-अलग धर्म के लोग हैं। यह फ़िल्म साबित करती है कि दोस्ती से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।
साल: 2013
प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स

‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा’

इस फ़िल्म ने हिन्दी फ़िल्मों में ही नहीं आम लोगों में भी दोस्ती का कल्चर बदल कर रख दिया था। यह फ़िल्म वाकई सच्चे दोस्त और उनकी दोस्ती को समझाती है। यह फ़िल्म हमे अपने दोस्तों को समझने का आसान सा तरीका समझाती है।
साल: 2011
प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स

‘3 इडियट्स’

इस फ़िल्म के बारे में कौन नहीं जानता। फ़िल्म हालांकि एक बहुत ही होशियार बच्चे की कहानी है लेकिन ऐसे दोस्तों की भी कहानी है जो हिन्दी सिनेमा में एक मिसाल बन गई।
साल: 2009
प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स

‘दोस्ताना’

यह दो ऐसे दोस्तों की कहानी है जो फ्लेट किराये पर लेने के लिए अपने आपको ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड बता देते हैं। यह फ़िल्म दोस्ती का एक नया नज़रिया पेश करती है।
साल: 2008
प्लेटफार्म: अमेजन प्राइम

‘गोलमाल’

यह फ़िल्म चार कमीने दोस्तों की कहानी है। यह फ़िल्म ऐसे दोस्ती के बारे में बताती है कि दोस्त आपस में तो जरूर कमीने होते हैं लेकिन मुसीबत के वक़्त हमेशा साथ होते हैं।
साल: 2006
प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स

‘दिल चाहता है’

यह फ़िल्म तीन दोस्तों की कहानी है। इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि एक दोस्त की ज़िंदगी में दूसरा दोस्त कहां तक दखलअंदाजी कर सकता है। एक दोस्त दूसरे दोस्त की पर्सनल लाइफ में कहां तक जा सकता है और कहां जाने पर दोस्ती खराब हो जाती है।
साल: 2001
प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स

‘कुछ कुछ होता है’

‘एक लड़का और एक लड़की कभी दोस्त नहीं होते’ इस फ़िल्म ने इस डायलॉग को गलत साबित कर दिया था। फ़िल्म में पहली बार एक लड़की और लड़के के रिश्ते को बहुत ही सच्चाई से दिखाया था। इस फ़िल्म ने ही हिन्दी सिनेमा में एक लड़की और लड़के के बीच दोस्ती को नया आयाम दिया था।
साल: 1998
प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स

‘दोस्ती’

यह फ़िल्म 1964 में रिलीज हुई थी। उस साल के सारे रिकार्ड इसके नाम थे। यह एक अंधे और लंगड़े दोस्त की कहानी है। दोस्ती पर बनी इस फ़िल्म की हिन्दी सिनेमा में आज भी मिसाल दी जाती है। इस फ़िल्म को और फ़िल्म में काम करने वाले कलाकारों को हिन्दी सिनेमा में हमेशा याद किया जायेगा।
साल: 1964
प्लेटफार्म: अमेजन प्राइम