गज़ब रोमांटिक स्टोरी
80%Overall Score

गर्लफ्रेंड चोर एम.एक्स प्लेयर पर सिर्फ पांच एपीसोड की छोटी सी सीरीज है। हर एपीसोड की समय सीमा भी 20 मिनट के आस-पास है।  यह पांच एपीसोड की सीरीज लेकिन देखने वालों के दिल को छू लेती है।

निर्देशक: ग्रीस जोटवानी

कलाकार: मयूर मोरे,कुसाग्र दुआ,शिशिर शर्मा,हिमानी शर्मा,सोनाली सचदेव।

प्लेटफार्म: MX PLAYER

गर्लफ्रेंड चोर  सुनकर ही लगता है ये कैसा नाम है। इस शब्द से लेकिन हर किसी का कभी ना कभी तो पाला पड़ा ही होगा। हर किसी की ज़िंदगी में एक ऐसा दोस्त होता ही है जिस पर लड़कियां फिदा होती हैं। यह दोस्त एक नम्बर का चालू भी होता है।

ग्रीस जोटवानी ने गर्लफ्रेंड चोर की कहानी भी एक ऐसे ही दोस्त विसाल(कुसाग्र दुआ) को सोचकर लिखी है। विसाल को लड़की के आने और जाने से बहुत ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता है। ब्रेकअप और प्रपोज उसके लिए बहुत ही आम सी बात है।

विसाल का दोस्त आकाश(मयूर मोरे) जो कोटा फैक्ट्री में क्लास के लिए जूझ रहा था। इस सीरीज में लड़की के लिए जूझ रहा है। वह हर लड़की को दिल दे बैठता है। आकाश लेकिन इतना प्यारा है कि वो सिर्फ और सिर्फ लड़कियों को रोने के लिए कंधा ही बनकर रह जाता है। आकाश की इसी प्रोब्लम को उसके टीचर पिता मोहन (शिशिर शर्मा) अच्छी तरह समझते हैं।

आकाश की फ्रेंड नेहा(हिमानी शर्मा) का ब्रेकअप चल रहा है। हिमानी आकाश के साथ वक़्त बिताकर अपने ब्रेकअप से उभर रही है। आकाश उसकी मदद कर रहा है। इसी बीच आकाश को नेहा से प्यार हो जाता है लेकिन आकाश के कहने से पहले ही उसका दोस्त विसाल नेहा को प्रपोज कर देता है। आकाश के अरमानों पर पानी फिर जाता है।

आकाश के पिता मोहन और उसकी मां सुनेना( सोनाली सचदेव) उसे मजबूत बनने के लिए प्रेरित करते हैं। वह नेहा का विसाल से ब्रेकअप कराकर आकाश से प्यार कराने का प्लान करते हैं। यहां से कहानी में एक लड़की रितु(दिक्षा जुनेजा) और जुड़ जाती है। रितु विसाल को प्यार करती है। रितु के आने पर कहानी में एक त्रिकोण बनता है।

आकाश और रितु दोनों मिलकर विसाल और नेहा का ब्रेकअप कराने में लग जाते हैं। ब्रेकअप कराने के चक्कर में रितु और आकाश इतने अच्छे दोस्त हो जाते हैं कि आकाश को अब नेहा से नहीं रितु से प्यार हो जाता है। आकाश इस से पहले रितु से अपने प्यार का इजहार करता। आकाश और नेहा का ब्रेकअप हो जाता है और विसाल रितु को प्रपोज कर देता है।

अंत में आकाश फिर खाली का खाली रोने के लिए कंधा बनकर रह जाता है।

सिनेमा की नज़र से

कुछ कहानियां ऐसी होती हैं कि जिनका हमें पता होता है कि कहानी है। उसके बाद भी हम उस कहानी में इतने खो जाते हैं कि अपना अतीत खोजने लगते हैं। यह एक अच्छे लेखक की कामयाबी होती है। गर्लफ्रेंड चोर भी उसी तरह की कहानी है जिसमें देखने वाला अपना अतीत खोजने लगता है।

निर्देशक ने बड़े साफ तरीके से इस बात पर ध्यान भी खींचा है। आकाश के पिता अपने जमाने के गर्लफ्रेंड चोर होते हैं। उसकी मम्मी को उन्होंने उनके ब्वायफ्रेंड सुहास(आशीष विधार्थी) से ब्रेकअप कराकर पाया था। उसकी मम्मी को लगता है कि मां-बाप का कर्मा बच्चों के आगे आता है। इसलिए उसके दोनों बेटों की गर्लफ्रेंड कोई और ले जाता है। आकाश के मां बाप इसे पितादोष मानकर सुहास से मांफी भी मांगते हैं।

निर्देशक जोटवानी ने बहुत ही प्यारे और सच्चे सीन फ़िल्माये हैं। किसी भी तरह के ड्रामें से उन्होंने बचने की कोशिश की है। एक लड़का और एक लड़की के बीच की बातें उन्होंने फ़िल्मी ना रखकर वैसी ही रखीं है जैसी रोजमर्रा की ज़िंदगी में लोग बात करते हैं। एक निर्देशक जब किसी को यह एहसास दिला दे कि जो पर्दे पर चल रहा है। वह लिखने वाले की नहीं देखने वाले की अपनी कहानी है। निर्देशक कामयाब हो जाता है। जोटवानी ने बहुत ही अच्छे से वो काम किया है।

मयूर मोरे इस से पहले कोटा फैक्ट्री जैसी सीरीज में काम कर चुके हैं। उनका वही तजुर्बा आकाश के किरदार को और ज़्यादा निखार देता है। वह कहीं भी किसी भी सीन में अपने किरदार से बाहर दिखाई नहीं देते हैं। बहुत ही हल्के फुल्के अंदाज में संयम बनाये हुए दिखाई देते हैं।

उनके साथ रितु के किरदार में हिमानी शर्मा भी एक नार्मल लड़की के किरदार पर आखिर तक अपनी पकड़ बनाये रखती है। शिशिर शर्मा ने इन बच्चों के साथ मिलकर कमाल किया है। आशीष विधार्थी का एक बहुत ही छोटा सा किरदार है लेकिन एक बात उसमें भी नज़र आती है। इसका श्रेय भी जोटवानी को ही जाता है क्योंकि एक अच्छा निर्देशक अच्छी एक्टिंग कराना जानता है।

सीरीज के बीच-बीच में एक गाना आता है। गाना किरदारों के हालात पर एकदम फिट बैठता है उसके बोल भी बहुत ही सच्चे हैं। एक अच्छी और बहुत ही हल्की फुल्की सीरीज जो इन दिनों आसानी से घर पर रहकर देखी जा सकती है। यक़ीन देखने के बाद यह सीरीज कितने लोगों को उनके अतीत में पहुंचा देगी।