क्राईम एण्ड जस्टिस
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होस्टेज2 में एक बार फिर से पृथ्वी (रोनित रॉय) ने एक प्लान बनाया है। वह उस प्लान को पूरी तरह से मुक़म्मल करना चाहते हैं। इंसान जो चाहता है लेकिन वैसा होता कहां है। वह फंस जाते हैं। एक ऐसे दलदल में जहां से निकलना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालातों में भी लेकिन वो हार नहीं मानते। वह फिर एक और प्लान बनाते हैं और उसे पूरा करने के लिए फिर बंदी बनाने वाला खेल खेलते हैं।

निर्देशक: सचिन कृष्णा, सुधीर मिश्रा
कलाकार:रोनित बोस रॉय, कंवलजीत सिंह, दिव्या दत्ता, डिनो मोरिया, शिबानी दांडेकर, आशिम गुलाटी, मोहन कपूर, अमित स्याल, दलीप ताहिल
प्लेटफार्म: डिज्नी+हॉटस्टार

पृथ्वी पहले सीजन के मुताबिक सी.एम.के.एल हंडा(दिलीप ताहिल) का मरा हुआ घोषित कर देता है। सी.एम की पत्नी भी उस प्लान में शामिल है। वह अपने पति की डमी को ही पति मानकर उसका अंतिम संस्कार कराने का आदेश दे देती है। पृथ्वी हंडा को लेकर कहीं विदेश जाना चाहता है ताकि वह अपनी पत्नी का ऑपरेशन करा सके।

के.एल  हंडा की गिरानी कर रहे एक ऐजेंट जो किसी और के लिए काम कर रहा है। उसे पता लगता है कि सी.एम जिंदा हैं। वह पृथ्वी के पीछे लग जाता है। उसे मालूम है कि पृथ्वी कुछ करने वाला है। वह उन सबको मारने के लिए उनके पीछे लग जाता है।

पृथ्वी हंडा को एक गांव के रास्ते से एयर पोर्ट लेकर जा रहा है। रास्ते में जाम मिलने के कारण पृथ्वी जब उतरकर देखता है तो हंडा वहां से भाग जाता है। पृथ्वी हंडा को पकड़कर एक खाली बिल्डिंग में घुस जाता है। हंडा के पीछे लगा ऐजेंट उनका पीछा करता हुआ वहां तक पहुंच जाता है। एजेंट हंडा को मारना चाहता है और पृथ्वी उसे बचाना चाहता है। इसी बीच गोली चल जाती है। गोली की आवाज से कुछ पुलिस वाले वहां पहुंचते हैं। पृथ्वी उन्हें भी बंधक बना लेता है।

यह खबर इतनी बड़ी हो जाती है कि वहां सारी पुलिस फोर्स पहुंच जाती है। पुलिस के साथ मीडिया भी पहुंच जाती है। यहां से पृथ्वी का प्लान फैल होता है।  सीरीज एक नये मोड़ पर आ जाती है। बिल्डिंग के बाहर पुलिस फोर्स खड़ी है। पृथ्वी अपने परिवार को और बिमार पत्नी को लेकर अंदर है। पृथ्वी यहां से एक नया प्लान बनाता है। वह अपनी पहचान छिपाकर पुलिस और सरकार के साथ सौदा कर रहा है। यहां से कहानी में इतने घटनाक्रम आते हैं कि एक-एक कर सारे किरदार उसमें समाने लगते हैं। सीरीज जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती है। उतनी ही घटनाएं भी बढ़ती जाती हैं। मीडिया, क्राईम, नेशनल, इमोशन, भृष्टाचार, धोखा सब कुछ 12 एपिसोड में समा जाता है।

सिनेमा की नज़र से

सुधीर मिश्रा से सीरीज को लेकर जो उम्मीदें थीं। उस उम्मीद से थोड़ा सा कम स्क्रीन पर नज़र आता है। उसके कई सारे कारण हैं। पहला तो कहानी में इतने घटनाक्रम हैं कि पृथ्वी का प्लान धुंधला सा हो जाता है। दूसरी बात है कि कहानी लम्बी खिचने के कारण झोल भी दिखने लगते हैं।

एक सीरीज जो पहले ही आ चुकी है। उसके मुख़्य किरदार जबकि पहले से ही स्टेबलिश हैं। निर्देशक को जबकि उन्हें बस अपनी आगे की कहानी में फिट करना था। उसमें भी कहीं ना कहीं चूक नज़र आती है।

एक सीरीज जो पहले आ जाती है। उसके दूसरे सीजन में किरदार वही रहते हैं। लेकिन दर्शक फिर भी कुछ अलग और नया देखना चाहता है। ऐसे में मुख़्य किरादारों की जिम्मेदारी पहले से भी ज़्यादा बढ़ जाती है। यह जिम्मेदारी सीरीज में रोनित रॉय के ऊपर थी। रोनित रॉय जो बस प्लान बना रहे हैं। वह कहीं से भी किसी भी एंगल से कुछ भी ऐसा नहीं कर रहे हैं कि देखने वालो को कुछ भी अलग लगे। सारी सीरीज में उनके चेहरे पर एक ही जैसे भाव दिखाई देते हैं।

इसके अलावा उनके साथ में अमित सियाल अपने जिस एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। वह किरदार जो उन्होंने जामतारा में निभाया था। वह किरदार जो उन्होंने मिर्जापुर में निभाया था। एकदम किरदार में उतर जाने वाली उनकी एक्टिंग लोगों को कायल करती है। इस बार लेकिन उनका वह किरदार दबा दबा सा है। सीरीज में एक्टिंग को लेकर डिनो मारिया की तारीफ बनती है। उन्होंने जिस तरह के फ़िल्मों में किरदार निभाये हैं। इस सीरीज में उनका किरदार थोड़ा सा अलग था। उन्होंने जिसे अलग ही अंदाज में निभाया है।

दिलीप ताहिल जो एक जमाने के मंझे हुए कलाकार हैं। उन्होंने अपनी खलनायक वाली इमेज से कितनी ही फ़िल्मों में जान डाली है। इस सीरीज में ऐसा लगता है कि उनके पास करने को बहुत कुछ नहीं हैं। सीरीज की कहानी में वो सिर्फ सतरंज का बिसात का वो सबसे अहम मोहरा हैं। सारी चालें जिनके लिए चली जा रही हैं।

कोई क्यों देखे?

होस्टेज का पहला सीजन जिन्होंने देखा था। वह इस सीजन को जरूर देखें ताकि महसूस कर सकें पहले सीजन में और इसमें क्या फर्क़ है। लेकिन पहले सीजन के जैसी उम्मीद लगाने पर निराशा हो सकती है। वह लोग भी देख सकते हैं जिन्हें ऐसी फ़िल्में पसंद हैं जिनमें बहुत जल्दी-जल्दी घटनाक्रम बदलते रहते हैं।