‘Kaali2’ Review: इस सीजन में पहले भाग से भी ज़्यादा मारकाट है

काली का तांडव
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काली2 जी5 पर 29 मई को रिलीज हुई है। काली का पहला भाग पिछले साल रिलीज हुआ था। यह बंगाल की ड्रग तस्करी पर आधारित है। कलकत्ता में एक कहावत है, काली कलकत्ते वाली तेरा वचन ना जाये खाली। काली कलकत्ता की देवी है जिसे मां भगवती का रूप में माना जाता है।

काली के बारे में कहा जाता है। काली जब अपना रूद्र रूप धारण करती है तो शत्रुओं का विनाश करती है। उसके वार से कोई शत्रु बच नहीं पाता है। काली सीरीज में काली का रूप भी कुछ वैसा ही है। वह पूरे कलकत्ते में तांडव मचा देती है। उस से भी उसका कोई शत्रु बच नहीं पाता है।

निर्देशक: अभीमन्यू मुखर्जी
कलाकार: पाओली दाम, अभीषेक बनर्जी, विध्या मालवाडे,चंदन रॉय सान्याल।
प्लेटफार्म: जी 5

काली के पहले भाग में काली(पाओली दाम) का बेटा सन्नी( चंदन रॉय सान्याल) हॉस्पीटल में है। काली को उसके इलाज के लिए पैसे चाहिए। काली पैसों के लिए ड्रग डिलीवरी करती है। वह उसमे ऐसी फस जाती है कि निकलना मुश्किल हो जाता है। वह अपने बेटे को बचाने के लिए ऐसा तांडव मचाती है कि एक ही रात में सारे कलकत्ते के ड्रग डीलरों का सफाया कर देती है।

काली2 को भी लगभग वैसा ही लिखा गया है। अरित्रा सेन ने कहानी में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं किया है। एक बहुत बड़ा ड्रग डीलर झिंग्या(अभीषेक बनर्जी) जिसके पीछे कई देशों की पुलिस पड़ी है। झिंग्या काली के पीछे पड़ा है। झिंग्या को पुलिस नहीं पकड़ पायी मगर काली ने उसे बर्बाद कर दिया।

पिछली सीरीज में एक पांच सौ के फटे नोट पर कहानी छूटी थी। इस बार उस नोट का महत्तव दिखाया है। उसी नोट को लेकर कहानी आगे बढ़ती है। काली का बेटा ड्रग माफियाओं के पास है। उन्हें नोट से हुई डिलीवरी का माल चाहिए। काली अपने बेटे को बचाने के लिए फिर से ऐसा तांडव मचाती है कि शहर कलकत्ता के सारे माफिया एक ही रात में साफ हो जाते हैं।

सिनेमा की नज़र से

पटकथा में रोहन घोष और कोर्णाक मुखर्जी ने बहुत कुछ खास नहीं किया है। बहुत सारा भाग पहले जैसा ही रखा है। काली के बेटे को अगवा कर लेना। काली का अपने बेटे की जान के बदले मुसीबत में पड़ जाना। पुलिस ऑफिसर अनीकेत( राहुल बनर्जी) का अपनी नौकरी दाव पर लगाकर काली का मदद करना। सब कुछ पहले सीजन के जैसा ही है।

कहानी कभी वर्तमान में चलती है तो कभी फलैशबैक में चलती है। काली भाग2 में लेकिन सस्पेंस पहले से ज्यादा है। इस बार नये किरदार के रूप में विध्या मालवाडे को लिया गया है। हालांकि उनका काम उतना कुछ खास नहीं लगा।

निर्देशक अभीमन्यू मुखर्जी ने काली2 में काफी कुछ नया करने की कोशिश की है। उन्होंने एक्टरों से अच्छी एक्टिंग करायी है। अभीषेक बनर्जी जो लगभग हर बड़ी सीरीज में दिखते हैं। इस सीरीज में भी उन्होंने बाकी सीरीज की तरह अच्छा काम किया है।

पाओली दाम की एक्टिंग की अगर बात करें तो काली2 में उनका किरदार कुछ खास नहीं लगता है। पहले भाग में देखने वालों के लिए काली का किरदार नया था। इस बार दूसरे भाग में भी काली का वही किरदार है। दर्शक को सब कुछ देखा भाला सा लगता है। काली के साथ में राहुल बनर्जी का किरदार भी वही है। वह सिर्फ काली को बचाने के लिए अपने सर मुसीबतें ले रहे हैं।

निर्देशक ने पहले भाग से कुछ ज़्यादा अलग नहीं किया है। सीरीज का संगीत काफी अच्छा है।

कोई क्यों देखे?

एक मां जो अपने बच्चे को बचाने के लिए किस हद तक जा सकती है। देखने लायक है।

आपने अगर बहुत दिनों से कोई क्राइम थ्रिलर सीरीज नहीं देखी तो देखकर अच्छा लगेगा।

इस समय सिनेमा हॉल में फिल्म नहीं रिलीज हो रही हैं। ऐसे में देखने के लिए एक अच्छी सीरीज है।

Naseem Shah: