‘Ladies Up’ Review: महिला कॉमेडियनों ने समाज की लगाई वाट

समाज पर तंज
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Netflix पर लेडीज अप नाम से चार एपीसोड की एक कॉमे़डी सीरीज शुक्रवार को रिलीज हुई है। आपने बहुत से कॉमे़डी शॉ में महिलाओं के लेकर मर्दों के जॉक्स सुने होंगे। फ़िल्म हो या कोई कॉमेडी शॉ हसाने के लिए जब कुछ कंटेट नही मिलता तो अक्सर महिलाओं पर डबल मिनिंग जॉक्स लिखे जाते हैं। इस सीरीज मे लेकिन उल्टा देखने को मिलेगा। पहली बार चार महिलाएं समाज की मानषिकता पर आपको हसाती हैं।

यह वैसे तो एक कॉमेडी शॉ है जिसमें चार लड़कियां जिन्हें अबला समझा जाता है पर वो अबला नहीं हैं। वह चारों की चारों इंडिया की बड़ी स्टेंडअप कॉमेडियन हैं। यह जो बातें करती हैं औरतें समाज मे वो बातें नहीं करती हैं।  वह रोजमर्रा की ज़िंदगी में होने वाली बातों को हसते-हसते बता रही हैं। जिन्हें सुनकर आप हसते ही जायेंगे। यह चार लडकियां कौन हैं?

यह पहले महिला दिवस के मोके पर 8 मार्च को रिलीज होने वाली थी लेकिन उस दिन गिल्टी फ़िल्म रिलीज होने की वज़ह से उसकी डेट आगे बढ़ाकर अब 27 मार्च को रिलीज हुई है।

कलाकार: प्रशस्ति सिंह, कनीज सुरका, सुप्रिया जोशी, निवेदिता प्रकासम

प्लेटफार्म: Netflix

प्रशस्ति सिंह

इस सीरीज का पहला ही एपीसोड प्रशस्ति सिंह से शुरू होता है। प्रशस्ति सिंह इस पहले अमेजॉन प्राइम ‘कॉमिकिस्तान’ के पहले सीजन के फाइनल तक पहुंची थीं।

प्रशस्ति सिंह मेट्रो सिटी में रहने वाली लड़कियों के बारे में बात करती हैं। जिनके सामने एक लड़का चुनने की आजादी तो है लेकिन उसमें भी कितनी शर्तें हैं। उन शर्तों पर ही आप लड़का चुन सकते हो। आप अगर तकनीक का सहारा भी लेते हो तो क्या मुश्किलें आती हैं उनको सुनकर आप हसते ही रह जाओगे।

कनीज सुरका

कनीज सुरका स्टैंड अप कॉमेडी में भारत के शीर्ष कॉमेडियनों में से एक हैं। वह अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल करती हैं लेकिन बातें बहुत ही जमीनी करती हैं। वह एक महिला के लाईफ स्टाइल को उनके ज़िदगी से जोड़कर अपना कंटेंट बनाती है। यही उनके काम का स्तर और बढ़ा देता है।

इस सीरीज के दूसरे एपीसोड मे वो कुछ ऐसे शब्दों की तरफ इसारा करती हैं जिनके कहने का मतलब कुछ और होता है लेकिन बॉड़ी लेंग्वेज के साथ उनका मतलब पूरी तरह बदल जाता है।

सुप्रिया जोशी

सुप्रिया जोशी अमेजॉन प्राइम वीडियो के स्टैंड अप कॉमेडी शो ‘कॉमिकिस्तान’ के दूसरे सीजन का हिस्सा थीं। उस शो में भी उन्होंने लोगों को काफी हसाया था। इस शॉ में भी उनका अंदाज थोड़ा अलग है।

इस शो में वह अपने आस-पास होने वाली गॉशिप और उन चीजों पर बात करती हैं जिन पर लोग बात करने से शर्माते हैं।

निवेदिता प्रकासम

निवेदिता प्रकासम टीएलसी के कॉमेडी शो ‘क्वीन्स ऑफ कॉमेडी’ को जीत चुकी हैं। यह इत्तेफाक की बात है कि कनीज उस शॉ की जज़ रही थी।

निवेदिता ने इस सीरीज में महिलाओं के उन रोजमर्रा के मुद्दों पर हसाते हुए मर्दों पर स्टायर करने की कोशिश की है। महिलाएं जो कुछ बसों में-रास्तों में चलते फिरते महिलाएं ज़्यादा तर अपने आस-पास देखती हैं।

हिन्दी सिनेमा और सीरीज

इस बात में कोई शक नहीं है। हिन्दी सीरीज ने सिनेमा में महिलाओं की एक नई छवि को गढ़ा है। उस महिला को जिसका असली रूप कभी सिनेमा मे नज़र नहीं आया था। हिन्दी सिनेमा का 1970 के बाद बहुत ही प्रोग्रेसिव दौर रहा है। उसके बाद भी लेकिन महिलाओं के प्रति हमने सिनेमा में कोई नई बात नहीं देखी थी। हिन्दी फ़िल्मों की महिला सिर्फ पुरूष हीरो के लिए लिखी जाती थी। जिसको सिर्फ अपनी मर्यादा में रहना होता था।

हिन्दी सीरीज जब आयीं तो उन्होंने महिलाओं का नये रूप में दिखाया। उसमें पर्मानेंनट रूममेट हो, मैड इनहेवेन, लस्ट स्टोरीज, सेक्रेड गेम्स, फैमली मैन सभी में महिलाओं के किरादर हिन्दी सिनेमा के किरदारों से एकदम अलग हैं।यही कारण है कि हिन्दी फ़िल्मों के मुकाबले हिन्दी सीरीज में महिलाओं को ज़्यादा अच्छे से लिखा गया है।

एक पुरूष जब सेक्स पर बात करता है तो उसकी बातों में महिला का पक्ष कमजोर होता है। एक महिला जो सेक्स पर बात करती है तो क्या होता है? जानने के लिए देख सकते हैं।

Naseem Shah: