अच्छा-खासा
80%Overall Score
Reader Rating 0 Votes
0%

समय के साथ सब कुछ बदल जाता है लेकिन क्या समय के साथ एहसास, फीलिंग्स भी बदल जाती हैं? हिन्दी में, गज़लों में, गीतों में, साहित्य में एक लम्बे समय तक नज़र आने वाले बेवफा, धोखा जैसे शब्द अब देहाती होकर रह गये हैं। शहर में उनकी जगह कुछ नये शब्द चलन में आये हैं सिंगल, रिलेशनशिप, ब्रेकअप, लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप, यह सभी प्यार की किस्में हैं। नेटफ्लिक्स पर लिटिल थिंग्स सीजन 3 इन्हीं में एक शब्द लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप पर ही आधारित है।

निर्देशक: रूचिर अरूण, सुमित अरोरा

लेखक: ध्रुव सेहगल, अभिनंदन श्रीधर

कलाकार: ध्रुव सेहगल, मिथिला पालकर

प्लेटफार्म: Netflix

इस से पहले लिटिल थिंग्स के दो सीजन में आपने देखा होगा कि एक लड़का और एक लड़की किस तरह एक दूसरे का सम्मान करते हुए एक साथ रहते हैं। हम जिसे लिव इन रिलेशनशिप कहते हैं। जिसमें एक लड़का और एक लड़की धीरे-धीरे एक दूसरे पर बोझ ना बनकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

लिटिल थिंग्स  सीजन 3 की कहानी लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप पर है। ध्रुव (ध्रुव सेहगल) और काव्या (मिथिला पालकर) अभी तक तो साथ रह रहे थे लेकिन ध्रुव को रिसर्च करने के लिए बैंगलोर जाना पड़ता है। काव्या अकेली पड़ जाती है। उधर ध्रुव अकेला पड़ जाता है। फिर दोनों ही धीरे-धीरे अपने काम में लग जाते हैं और एक दूसरे के बिना रहने की आदत ड़ाल लेते हैं।

ध्रुव वापस लौटता है तो काव्या अपने घर पर चली जाती है। उसके पापा रिटायर होने वाले हैं। काव्या बहुत दिनोंं बाद अपने मम्मी पापा के साथ रहने नागपुर आती है तो उसे बचपन की बहुत सारी बातें याद आने लगती हैं। काव्या अपने घर से लौटती है तो ध्रुव अपने घर दिल्ली आ जाता है। दिल्ली में ध्रुव का घर बिक गया है। उसकी मम्मी दिल्ली से गुडगांव सिफ्ट होने के लिए पैकिंग कर रही हैं। ध्रुव को उसके दोस्त और उसकी मां एहसास कराते हैं कि तेरा घर बिक रहा है और तुझ पर कोई फ़र्क ही नहीं पड़ रहा है। ध्रुव उन के सामने स्वीकार नहीं कर रहा है लेकिन उसे फ़र्क तो पड़ रहा है डो उसके स्वभाव में नज़र आ रहा है।

ध्रुव जब वापस मुम्बई आता है तो काव्या और उसके बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर नोक-झोक होने लगती है। ध्रुव छोटी-छोटी बातों में इरिटेट हो रहा है। काव्या को अच्छा नहीं लग रहा है, काव्या उस से बात करने की कोशिश करती है लेकिन दोनों शब्दों में उलझ कर रह जाते हैं। किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाते हैं।

एक दिन ऐसा आता है कि दोनों ही एक दूसरे पर भारी बनने लगते हैं। काव्या और ध्रुव दोनों ही एक दूसरे से अलग होने की बातें करने लगते हैं। काव्या मुम्बई छोड़कर नागपुर चली जाती है। ध्रुव अकेला सड़क पर खड़ा रह जाता है।

सिनेमा की नज़र से

लेखक ने लोंग डिसटेंस रिलेशनशिप की तह में जाने की तो काफी अच्छी कोशिश की है। हिन्दी फ़िल्मों की तरह बहुत ही बड़ी-बडी बातों को ना लेकर रोजमर्रा बहुत छोटी-छोटी सी बातों पर सीन लिखे हैं। जैसे एक समय के बाद हम शब्दों के अर्थ खो देते हैं। हम सिर्फ़ खाली शब्दों में उलझकर रह जाते हैं। काफी अच्छे से दिखाया है।

निर्देशक और लेखक ने चालाकी से फेक न्यूज की तरफ भी ध्यान खीचने की कोशिश की है। एक रिसर्च स्कोलर को क्या दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। उसकी रिसर्च के आम लोगों के लिए क्या मायने हैं। किसी बेरोजगार रिसर्च स्कोलर को उसके दोस्त उसके घरवाले कैसे देखते हैं और उन सबका उसके निजी जीवन पर क्या असर पड़ता है। काफी अच्छे से दिखाने की कोशिश की गई है।

ध्रुव और काव्या दोनों ने ही एक्टिंग में बहुत ही सरलता दिखाई है कहीं भी ऑवर होने की कोशिश नहीं की है। जिस से हर सीन और ज़्यादा रियल लगने लगता है। बहुत जगह तो जवाब ना देकर बहुत ही साधारण सा रियक्शन दिया गया है जो एक्टिंग को और ज़्यादा बेहतर कर देता है।

एक्टिंग और थीम के हिसाब से ही लोकेशन का इस्तेमाल किया है। कैमरा लाईटिंग और कभी-कभी इस्तेमाल किये गये, खिड़की के बाहर उगते सूरज का सीन, गुडगांव के बाहर दूर तक फैले हरे जंगल का सीन पेंटिंग्स से लगते हैं। संगीत भी ठीक-ठाक ही है।

क्यों देखना चाहिए?

इस समय रिश्तों के मायने बदल रहे हैं। हर कोई एक ऐसा रिश्ता चाहता है जिसमें दो लोग एक दूसरे को आगे बढ़ायें एक दूसरे की मजबूती बने। ऐसे में दो प्रेमी अगर साथ नहीं रहते हैं तो उनके बीच रिलेशन अकसर डगमगाने लगते हैं, उसकी क्या वज़ह होती हैं?ऐसा क्यों होता है? एक प्रेमी और प्रेमिका रिलेशन में रहते हुए भी कैसे दूर रहकर आगे भी रिश्ते को बचा सकते हैं। यह समझने के लिए भी एक बार देखना चाहिए।

इस समय प्यार और प्रोफेशनल लाइफ को कैसे एक साथ जियें। घरवालों की बातों का किस हद तक हमारी लाईफ पर असर पर पड़ता है।घरवालों के साथ किस तरह का रिलेशन होना चाहिए।  इन सब रिश्तों को समझने के लिए भी देखना चाहिए।

आप चीजों को समझने का अपना अलग नज़रिया रखते हैं। आपके सामने किस-किस तरह की मुश्किलें आ सकती हैं और उन मुश्किलों को कैसे हल करना है जानने के लिए भी देखना चाहिए।