गांधी जी का जन्म 2 अकटूबर को पोरबंदर गुजरात में हुआ था। एक छोटी से जगह से निकलकर उन्होंने दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित किया। उनके विचारों का लोहा नाकि भारतीय लोगों ने बल्कि अंग्रेजों ने भी माना था। उन्होंने भारत में होने वाले आंदोलनों को एक दिशा दी। उन्होंने अंग्रेजी सरकार के ख़िलाफ भारतीय लोगों को शांतिप्रिय आंदोलनों की ऐसी शक्ति दी जिस से अंग्रेजी सरकार को कई बार विवश होना पड़ा था।

यह 30 जनवरी 1948 की बात थी जब गांधी जी की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या पर भारत ही नहीं दुनिया भर के लोगों ने शोक मनाया। ”यह दिखाता है कि अच्छा होना कितना ख़तरनाक होता है.” जार्ज बनार्ड शॉ ने गांधी जी की हत्या की खबर से आहत होकर कहा था। किंग जॉर्ज षष्टम ने संदेश भेजा, ”गांधी की मौत से भारत ही नहीं संपूर्ण मानवता का नुक़सान हुआ है.”

उनके विरोधियों ने भी उनकी हत्या पर दुख जताया था। दक्षिण अफ़्रीका से गांधी के धुर विरोधी फ़ील्ड मार्शल जैन स्मट्स ने कहा, ”हमारे बीच का राजकुमार नहीं रहा.” मोहम्मद अली जिन्ना ने अपने शोक संदेश में कहा, ”वह हिंदू समुदाय के महानतम लोगों में से एक थे.” गांधी जी एक इंसान नहीं बल्कि एक विचार थे। वह ऐसा विचार थे जिस से दुनिया के लोग प्रभावित हुए और होते रहेंगे।

गांधी जी के विचारों पर सिर्फ किताबें ही नहीं लिखी गईं। उनके विचारों से प्रभावित होकर उनके बाद के कई बड़े निर्देशकों ने उन पर फ़िल्में बनायी हैं। उन फ़िल्मों पर नज़र डालें।

‘9 आर्स टू रामा’ (1963)

इस फिल्म को डायरेक्ट किया है ब्रिटिश डायरेक्टर मार्क रॉबसन ने. फिल्म में एक भी इंडियन एक्टर नहीं हैं. फिल्म में जितने भी आर्टिस्टों ने काम किया है वो सभी ब्रिटिश, जर्मन और अमेरिकन एक्टर हैं.

‘गांधी’ ( 1982)

गांधी जी के जीवन से प्रभावित होकर रिचर्ड अटेंबोरफ ने गांधी  फ़िल्म बनायी थी। फ़िल्म में बेन किंगस्ले ने गांधी जी का गौरव शाली किरदार निभया था। बापू पर बनी इस फिल्म ने आठ ऑस्कर के साथ ही बाफ्टा, ग्रैमी, गोल्डन ग्लोब और गोल्डन गिल्ड समेत 26 अवॉर्ड अपने नाम किए थे।

‘मेकिंग ऑफ महात्मा’ (1996)

इस फ़िल्म में मोहनदास के एक आम आदमी से महात्मा बनने तक के सफर तक को दिखाया है। अफ्रीका में अन्याय और भारत में अंग्रेजों के ख़िलाभ अंहिसा आंदोलन से लेकर राष्ट्रपिता तक के सफर को दिखाया है। फ़िल्म में रजित कपूर ने गांधी जी का किरदार निभाया है। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट ऐक्टर का सिल्वर लोटस अवॉर्ड भी मिला था।

‘हे राम’ (2000)

कमल हसन ने गांधी जी के जीवन से प्रभावित होकर ‘हे राम’ बनायी थी। ‘हे राम’ गांधी के मुख से निकले अंतिम शब्द थे। जब गोडसे ने उनको गोली मारी थी। फ़िल्म में बंटवारे के बाद हुई हिंसा को समझाने की कोशिश की है। उनका हत्यारा किस हद तक उनसे नफरत करने लगा था। फ़िल्म में गांधी जी की भूमिका नसीरूद्दीन शाह ने निभायी थी। इस फिल्म को भी उस साल भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए भेजा गया था।

‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ (2005)

फ़िल्म में अनुपम खेर, उर्मिला मातोंडकर, रजत कपूर, बोमन ईरानी, वहीदा रहमान, प्रेम चोपड़ा जैसे कलाकार नजर आए थे। अनुपम खेर को गांधी की हत्या का फोबिया हो जाता है।

‘लगे रहो मुन्ना भाई'(2006)

इस फ़िल्म ने गांधी के विचारों को युवाओं में जीवित कर दिया था। फ़िल्म में युवा गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर असल में लोगों को फूल पहुंचाने लगे थे। वह लड़ने की जगह खुद गलती मानने लगे थे। फ़िल्म को राजकुमार हिरानी ने बनाया था। इस फिल्म ने भारत के साथ ही यूएस में भी कई अहिंसात्मक आंदोलनों को प्रेरणा दी। यूनाइटेड स्टेट नेशन में दिखाई जाने वाली यह पहली हिंदी फिल्म है।

‘गांधी, माई फादर’ (2007)

फ‍िल्‍म में द‍िखाया गया है कि हर‍िलाल को लगता है ‘देश के पिता’ होने के बावजूद महात्‍मा गांधी उसके ल‍िए एक अच्‍छे प‍िता होने में असफल हैं। फ‍िल्‍म में गांधी का किरदार दर्शन जरीवाला और उनके बेटे हर‍िलाल गांधी का किरदार अक्षय खन्‍ना ने न‍िभाया था। फ‍िल्‍म को नैशनल अवॉर्ड मिला था।

गांधी जी एक विचार हैं जो जिसकी जरूरत हर समाज को है। हर धर्म को है। हर तबके, हर महकमे को है।