ठीक-ठाक
65%Overall Score
Reader Rating 0 Votes
0%

मसीहा नाम से एक सीरीज नेटफ्लिक्स पर 1 जनवरी 2020 को रिलीज हुई है। इसमें बहुत कुछ ऐसा है जिसके बारे में हमने लगभग दुनिया की हर धार्मिक किताब में पढ़ा है। दुनिया में जब ज़ुल्म बढ़ जायेगा, जब चारो तरफ तबाही होगी, जब हर आदमी को अपनी-अपनी पड़ी होगी, लोग आपस में एक दूसरे को मार रहे होंगे, ईश्वर से लोगों का भरोसा उठता जायेगा। लोग अपने-खुदाओं को नकार देंगे। इस धरती पर फिर से किसी मसीहा का अवतार होगा। दस एपीसोड की सीरीज इसी विश्वास और अविश्वास को दर्शाती है।

भाषा: अंग्रेजी, हिन्दी

निर्देशक: जेम्स एम.सी टेग्यू, केट वुड्स

लेखक: माइकल बॉन्ड,एमी लुईस जॉनसन,माइकल पेट्रोनी,केली विल्स आदि

कलाकार: मेहदी देहबी, मिशेल मोनाघन,जॉन ऑर्टिज़, टोमर सीजली, स्टेफानिया लावी ओवेन, सैय्यद अल आलमी

कहानी उस आदमी की है। लोगों ने जिसे मसीहा मानकर अल मसीह (मेहदी देहबी) का नाम दिया है। यह आदमी झूंठ बोल रहा है दुनिया की सारी एजेसियां इस बात को साबित करने में लगी हैं। दुनिया भर की सारी एजेंसियां उसके ख़िलाफ हैं लेकिन आधी दुनिया उसके साथ है।

अल मसीह नाम का ये आदमी सीरिया में तबाह हो चुके लोगों को स्पीच देता है कि वो उनको राहत दिलायेगा। सभी लोग उसके पीछे चल देते हैं। वह उन लोगों को इजरायली सीमा पर छोड़कर जैल से गायब हो जाता है।

इस आदमी के पीछे अब अमरीकी एजेंसी के साथ इजराइल की एजेंसी भी लग जाती है। यह आदमी एक अमरिकी शहर में पाया जाता है। जहां लोगों को भ्रम हो जाता है कि वो मसीहा है। वह वहां से उन लोगों का एक काफिला लेकर न्यूयार्क की तरफ चल देता है। यह काफिला इतना बढ़ जाता है कि इसका सीधा असर सरकार पर पड़ता है।

अल मसीह के बारे में एजेंसी उसके भाई से पता लगा लेती हैं कि वो एक जादूगर था। वह जादू जानता है। उस से जो भी बात करता है वो उसी को वश में कर लेता है। मि. प्रेसीडेंट भी जिस से नहीं बच पाते हैं। यह आदमी झूंठा है या फिर मसीहा है। इस सवाल का जवाब सीरीज के अंत में भी नहीं मिल पाता है। इसका जवाब हो सकता है कि इसी सीरीज के दूसरे भाग में मिले।

सिनेमाई नज़र से

मसीहा की कहानी को 9 लेखकों ने मिलकर लिखा है। इसे देखने के बाद ऐसा लगत है कि 9 लोगों ने मिलकर कोई खिचड़ी बनायी है। जो थोड़ी बेस्वादी रह गई। सीरीज के कॉन्सेप्ट के जरिये इस समय दुनिया के जो हालात हैं, उन्हें छूने की अच्छी कोशिश तो है लेकिन सिनेमा मनोरंजन का नाम है। सीरीज में जिसकी कमी दिखती है।

सभी धार्मिक किताबों के मुताबिक कोई अवतार आयेगा। अल मसीह के पीछे जिस तरह से दुनिया भर के लोग आंखें बंद करके चल देते हैं। उसमें एक सच्चाई तो है कि दुनिया के हर देश में हर दुखी आदमी किसी मसीहा का इंतजार ही कर रहा है। दुनिया में हर जगह लोग परेशान हैं। थ्योरी के हिसाब से तो सही है।

लेकिन एक आदमी किसी जैल से गायब हो जाता है। वह पानी पर चलने लगता है। वह लोगों के भूत-भविष्य के बारे में जानकारी रख़ता है। यह सब थोड़ा तो ज्यादा हो जाता है।

सीरीज का पहला एपीसोड दर्शकों का ध्यान खींचता है। दूसरा एपीसोड भी कुछ हद तक बांधे रखता है। उसके बाद लेकिन निर्देशन में भी बहुत सारी कमियां दिखने लगती हैं। जैसे सीरीज के दो मैन किरदार जो हीरो अवीरम (टॉमर सीजली) और इवा (मिशेल मोनाघन) कुछ ख़ास नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा लगता है वो बस जैसे कैमरे के आगे पीछे घूम रहे हैं। ऐसा तब है जब निर्देशन में दो लोगों का दिमाग लगा है।

अल मसीह के रूप में मेहदी देहबी लोगों के दिल में नहीं उनके दिमाग में जगह बनाते हैं। उनके किरदार के आस-पास कोई दूसरा दमदार किरदार नज़र ही नहीं आता है। ऐसा लगता है कि वो अकेले ही अपने दम पर सीरीज को खींच रहे हैं।

देखें या ना देखें?

यह सीरीज अरब मुल्कों में मची अफरी तफरी से शुरू होती है। युद्द के बाद वहां के हालातों को छूने की कोशिश करती है। वहां के लोगों पर उसका क्या असर पड़ रहा है। दो एपीसोड के बाद लेकिन मुद्दा बदल जाता है। वह एक स्तर पर अल मसीह के सच और झूंट की कहानी बनकर रह जाती है। हालांकि देखने वाला उस आदमी के बारे में जानने को परेशान भी रहता है जिसे लोग मसीहा कहते हैं।

इस सीरीज को देखते हुए गौर करने पर पता चलेगा कि इसमें बहुत सारे किरदारों से धार्मिक मान्यताओं पर क्रिटीक भी किया है। जो बहुत ही सिम्बॉलिक है। देखने के बाद दर्शक इसलिए भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाता है।

दुनिया की बहुत सारी फोलॉसॉफी को एक जगह मिलाकर कहानी बनायी गयी है। आप कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो थोड़ा हटकर हो और आपको एक अलग दुनिया में ले जाये तो देख सकते हैं।