‘Never Kiss Your Best Friend’ Review: पुरानी कहानी पर मॉर्डन तड़का

दिल, दोस्ती और दूरियां
60%Overall Score

‘एक लड़का और एक लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते’। हिन्दी सिनेमा में इस लाईन को बहुत ही ज़्यादा इस्तेमाल किया गया है। यह लाईन सबसे पहले सलमान ख़ान की फ़िल्म मैने प्यार किया  में बोली गई थी। इसके बाद तो इस लाईन को एक फलॉसफी मानकर करन जौहर ने कुछ-कुछ होता है  जैसी ब्लाक बस्टर फ़िल्म का निर्माण कर दिया। करन जौहर की सफलता देख निर्देशकों ने इस आईडिया को कमाई की चाबी मान लिया।

इसी लाइन से प्रभावित होकर सुमृत शाही ने किताब लिखी नेवर किस योर बेस्ट फ्रेंड  उस से प्रभावित होकर निर्देशक आरिफ ख़ान ने सीरीज ही बना दी। जिसे Zee5 ने 20 जनवरी 2020 को रिलीज किया है।

निर्देशक: आरिफ खान

कलाकार: अन्या सिंह, नकुल मेहता

प्लेटफार्म: Zee5

आप हॉलीवुड की फ़िल्में देखिए! एक ड्रेगन आदमी की दोस्त हो सकती है, एक भेडिया आदमी का दोस्त हो सकता है। एक भालु आदमी का दोस्त हो सकता है। एक मोगली सारे जंगल के जानवरों का दोस्त हो सकता है। और बॉलीवुड में एक लड़का और एक लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते?

यह बात पूरी सीरीज में तानी (अनया सिंह) को उसकी मां और उसके दोस्त समझाते रहते हैं। सुमेर (नकुल मेहता) तानी का वो दोस्त है जो कभी उसका दोस्त नहीं हो सकता। इन दोनों की मम्मी बेस्ट फ्रेंड हैं और हो सकती हैं। पर बच्चे नहीं हो सकते हैं।

सुमेर की एक गर्लफ्रेंड है। तानी का भी एक ब्वाय फ्रेंड है। सुमेर अपनी गर्लफ्रेंड को तानी के घर पर लाकर सेक्स कर सकता है लेकिन तानी अपने ब्वायफ्रेंड के साथ ऐसा करने का सोचती है तो सुमेर को दिक्कत होती है। क्योंकि वो सुमेर है तानी पढ़ी लिखी है समझदार है लेकिन है तो तानी ही।

तानी का एक ब्वायफ्रेंड रिहान है। तानी उस से प्रभावित है। वह ऐसी बातें पढ़ता है सुमेर की नज़रों में जिन्हे नार्मल आदमी को नहीं पढ़ना चाहिए। जैसे दुनिया में इतनी गरीबी क्यों हैं, सुमालिया में बच्चे क्यों भूकें मर रहे हैं। सुमेर को इसलिए वो अजीब लगता है। उसे सुमेर एक दिन कॉन्डॉम खरीदते देख लेता है। सुमेर अपनी दोस्ती निभाते हुए तानी को बताता है कि रिहान उसको धोखा दे रहा है। वह धोखेबाज है। एक दिन तानी को पता चलता है कि सुमेर तो सही कह रहा था। यानी एक लड़की जो आदमी की आंख की पुतली हिलते ही उसकी फितरत को पहचान लेती है उसे उसका दोस्त बताता है कि उसके दोनों ब्वायफ्रेंड उसके लिए सही नहीं है।

सुमेर तानी को उसके ब्वायफ्रेंड की असलियत बताता है तो तानी उसको उसकी मां की असलियत बताती है। सुमेर की मां के उसके पापा के अलावा भी किसी और से सबंध हैं। यह बात उसके पापा को भी पता है। बस सुमेर की नहीं पता है।  जिसके बाद वो ड्रग्स लेने लगता है।

सुमेर इसी बात से परेशान रहने लगता है। तानी और सुमेर अलग-अलग हो जाते हैं। एक लम्बे वक़्त के बाद फिर से दोनों मिलते हैं। इस बार दोनों को ही एहसास होता है कि वह दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। वह अच्छी दोस्ती के चक्कर में प्यार नहीं कर पा रहे हैं। अंत में दोनों ही दोस्ती को प्यार में बदल लेते हैं।

सिनेमा की नज़र से

‘एक लडका और एक लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते’…इसके पीछे की जो जर्नी है वो काफी हद तक मजेदार लग सकती है।  एक लड़का और एक लड़की के बीच की अच्छी कैमस्ट्री देखने को मिल सकती है। प्यार होने और हो जाने का प्यारा सा एहसास भी हो सकता है। लेकिन इस समय के हिसाब से सीरीज की इन बातों को नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता।

एक लड़की को जैसे एक लड़का नहीं सिखा सकता कि उसके के लिए क्या सही और क्या गलत है। उसे खुद ही फैंसला करना होगा, वो क्या चाहती है। मां बाप जिन्हें हमने देवी और देवताओं के रूप में फ़िल्मों में देखा है। इस सीरीज में सुमेर के मां बाप का ज़िंदगी जीने का नया अंदाज है, जिसे उनका मॉर्डन लड़का बर्दाश ना करके ड्रग्स लेने लगता है।

फ़िल्म की लोकेशन और ज्योग्राफी बॉलीवुड से कम हॉलीवुड से ज़्यादा प्रभावित लगती है। मैन कास्ट को छोड़कर बाकी एक्टरों के पास बहुत कुछ करने के लिए नहीं है, इसलिए सारा ध्यान तानी और सुमेर पर ही बना रहता है। कुछ सीन देखने में ऐसे भी मिलेंगे जिन्हें आप बहुत बार देख चुके हो। जैसे एक लड़के को एम.बी.ए नहीं करना है, फ़िल्म निर्देशक बनना है। यह इम्तियाज अली की फ़िल्मों में बहुत बार देख चुके हैं।

एक नायक होता है और एक नायिका होती है। उन दोनों को अच्छा दिखाने के लिए उनके आस-पास के लोगों को बिना लॉजिक जबरदस्ती खराब बना दिया जाता है। यह बहुत ही पुराना और बेसिक तरीका है। नये दौर की कहानी में देखने वाला उम्मीद करता है कि कुछ तो नया होता।

सुमेर और तानी के बीच एक रिश्ता है। सुमेर तानी को प्रोटेक्ट करता है। यह इत्तेफाक़ बार-बार नहीं होता कि सुमेर को छोड़कर जो भी लड़का उसको मिल रहा है वो गलत ही है। एक लड़का जो पढ़ता लिखता है। देश दुनिया के बारे में अपना एक नज़रिया रखता है। उस पर शक करना, बूढ़ा ओल्ड ग्रुप बोलना लेखक की समझदारी नहीं है। एक अच्छा लेखक अपनी रॉय देने की जगह किरदारों पर काम करता है।

मैं सही मायनों में अपनी राय दूं तो पुरानी कहानी को मॉर्डन रूप में दिखाया गया है। किसी को अच्छा लग सकता है और किसी को नहीं।

Naseem Shah: