भूतिया कॉमेडी
50%Overall Score
Reader Rating 0 Votes
0%

भूत होते हैं कि नहीं होते हैं। इस बात पर सिनेमा बनाने वालों ने कभी बहस नहीं की। वह अपनी-अपनी समझ के हिसाब से भूतों को पर्दे पर दिखाते रहे हैं। हिन्दी सिनेमा में भूतों को बहुत ही बुरी शक्ल और इंसानियत का दुश्मन दिखाने की प्रथा यहां की लोक कथाओं से चुराई गई है।

आज के सिनेमा में लेकिन भूतों की परिभाषा बदली है। आज की पीढ़ी के लोग भूतों को अपने हिसाब से दिखाते हैं। आज के सिनेमा के भूत खूंखार नहीं है। वह पढ़े लिखे हैं। वह अपने अकेलेपन से जूझ रहे हैं। उन्हें खेलना है। वह उस जगह से प्यार से करते हैं जहां वो मरे थे। ऐसे कुछ भूतों की कहानी ही ऑफ़िशियल भूतियागिरी है।

निर्देशक: विश्वाजॉय मुखर्जी
लेखक: तरूण ददुजेा, परिजात जोशी।
कलाकार: सुमित व्यास, ईशा चोपड़ा, प्रणय मनचंदा।
प्लेटफार्म: Arre, Mx player

कहानी जैसी की लगभग हर भूतिया फ़िल्म की होती है, वेसी ही है। दिलावर सिंह(सुमित व्यास) बैंक क्रप्सी में जेल से बाहर आता है। उसके पिता उसे अपने बाप दादाओं के महल में हॉटल चलाने के लिए कहते है। हॉटल में एक नौकर और 6 महीने से एक लेखक महावीर सिंह रह रहा है। इन दोनों का कहना है कि वहां बच्चों के अक्स दिखाई देते हैं।

दिलावर अपने छोटे भाई केस(प्रणय मनचंदा) के साथ और अपनी प्रेमिका मल्लिक(ईशा चोपड़ा) के साथ हॉटल को चलाने की पूरी कोशिश करते हैं। हॉटल में भूत होने की बात जब लोगों का पता चलती है तो कुछ लोग वहां मस्ती करने आते हैं लेकिन निराश होकर जाते हैं।

दिलावर सिंह का शक महावीर पर जाता है। दिलावर सिंह महावीर से अपने हॉटल का कमरा खाली करा लेता है। दिलावर सिंह को बैंक से नोटिस आ जाता है। बैंक का कर्जा ना चुका पाने के जुर्म में उसका हॉटल निलाम होता है। निलामी में शामिल लोगों को बच्चों के भूत दिखाई देने लगते हैं। वह सब लोग भाग जाते हैं। हॉटल बच जाता है।

कहानी बहुत सारी भूतिया फ़िल्मों से थोड़ी-थोड़ी सी मिलती है। यह बात समझ में नहीं आती कि हर फ़िल्म में भूत हॉटलों में पुरानी प्रोपर्टी में ही क्यों रहते हैं। बू, रागिनी एम.एम एस 2, टाईप राईटर  सारी सीरीजों के भूत हॉटल में ही रहते हैं।

भूतिया गिरी के पांच एपीसोड हैं। पांच एपीसोड में क्या हो रहा है। कहानी किधर जा रही है। कुछ पता ही नहीं चलता है। एक्टर के पास ऐसा कुछ करने को ही नहीं है जिस से वो दर्शकों को हसाये या रूलाये। यह बात साफ है कि लेखक की कोशिश रही थी कि 4 एपीसोड में वो हसाये और अंत में इमोशनल कर दे। अफसोस लेकिन वो कुछ नहीं कर पाया। यह एक साधारण सी कहानी बनकर रह जाती है। जिस से बहुत ज़्यादा मजे की उम्मीद बेमानी होगी।

सिनेमा की नज़र से

ऑफिसिलयल चूकियागिरी 2016 में रिलीज हुआ था। भूतिया गिरी उसी का तीसरा सीजन है। आप देखने के बाद खुद ही समझ जायेंगे कि यह इतनी देर से क्यों रिलीज किया गया। चूकियागिरी उस जमाने के हिसाब से फिर भी सही था क्योंकि वो दौर वैब सीरीज का शुरूवाती दौर था। उस समय तक बड़ी-बड़ी सीरीज नहीं आयी थीं।

निर्देशन में विश्वाजॉय मुखर्जी ने ऐसा कुछ खास नही किया। बहुत ही साधारण सी लाइटिंग दिखती है। कहानी की शुूरवात अच्छी होती है। दिलावर सिंह जेल से छूटकर बाहर आता है। उसके पिता उसे जिस हॉटल को चलाने के लिए भेजते हैं वहां भूत हैं।

यह बात बार-बार लोगों की जबान से पता चलती है स्क्रीन पर ऐसा कुछ नहीं दिखाई देता जिस से देखने वालों को भी लगे कि वहां भूत रहते हैं। वह बार-बार इधर-उधर की बात करके हसाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि जिस पर फोक्स करना था वहीं छूट जा रही है। अंत तक आते-आते ऐसा लगने लगता है सीरीज का नाम भूतियागिरी नहीं फैंमली ड्रामा होना था।

टेक्नीकल ग्राऊंड एक बार सत्यजीत ने किसी को कहा था कि कैमरा निर्देशक का आईना होता है। वह उसे कट होते ही सब कुछ बता देता है। बहुत ही साधारण सी फ्रेमिंग है, जबकि भूतों की स्टोरी को पर्दे पर दिखाने के लिए कैमरे का सबसे ज़्यादा कमाल होता है। लाईटिंग भी थोड़ी कमजोर सी लगती है।

एक्टिंग सुमित व्यास उन कलाकारों में एक हैं जो शुरूवाती वैबसीरीज पर्मानेंट रूममेट में काम कर चुके हैं। उसी सीरीज से लोगों ने उन्हें पहचाना था। उसी के बाद उनका फ़िल्मी सफर रफतार पकड़ गया। उनसे जिस तरह की उम्मीदें रहती हैं। इस सीरीज में वैसी कोई उम्मीद दर्शकों को नहीं रखनी चाहिए। उनके साथ में प्रणय मनचंदा जो बार-बार अपने पुराने अंदाज में दर्शकों को हसाने की कोशिश करते हैं लेकिन हसी है के आने का नाम ही नहीं लेती है।

क्यों देखें? भूतिया गिरी के सिर्फ पांंच एपीसोड हैं। यह सीरीज आपका बहुत ज़्यादा समय नहीं लेती है। यह सीरीज की सबसे अच्छी बात है। बहुत ज्यादा आपको ना सीरियस करती है और ना ही बोर करती है। इस समय जब सबको घर पर ही रहना है तो एम.एक्स प्लेयर पर फ्री में देखने में कोई बुराई नहीं है। यह सीरीज आपको वैब सीरीज के शुरूवाती दौर की याद दिला देगी।