पाताल लोक के कीडे
90%Overall Score

दस एपीसोड देखने में 10 घंटे लगते हैं। एपीसोड अगर अच्छे होते हैं तो आपको समय की चिंता ही नहीं रहती है। आप अगर कुछ बहुत अच्छा देख लेते हो तो जब तक उसके सीन ज़हन से नहीं निकलते हैं तब तक आप से उस से बेहतर कुछ नहीं देख लेते हैं। अमेजन प्राइम की पाताल लोक वैसी ही एक सीरीज है जिसे देखते हुए आपको समय की चिंता नहीं रहती है।

क्रिएटर: सुदीप शर्मा
निर्देशक: अविनाश अरूण, प्रोसित रॉय
लेखक: सुदीप शर्मा, गुंजित चोपणा, सागर हवेली, हार्दिक मेहता।
कलाकार: जयदीप अहलावत, नीरज काबी, अभीषेक बनर्जी, गुल पनाग, निहारिका दत्त, आसिफ खान, राजेश शर्मा आदि।
प्लेटफार्म: अमेजन प्राइम

कहानी में लेखक दुनिया के तीने हिस्से बताता है। एक स्वर्ग लोक जहां देवता रहते हैं। दूसरा है धरती लोक जिसमें आदमी रहते हैं। तीसरा है पाताल लोक जहां कीड़े मकोडे रहते हैं। इसी को आधार मानते हुए लेखक दिल्ली को तीन भागों में बांटता है। साऊथ दिल्ली स्वर्ग लोक, बीच का हिस्सा दुनिया लोक और जमना पार पाताल लोक।

दिल्ली पुलिस में इंसपेक्टर चोधरी हाथी राम की पोस्टिंग इसी पाताल लोक यानी जमना पार के एक थाने में हैं। हाथी राम को उसके थाने में, घर में, परिवार में सब लोग बेवकूफ मानते हैं। उसके नीचे ट्रेनिंग लिए हुए लोग उसके उपर अधिकारी बने बैठे हैं। उसे छोटे-मोटे लड़ाई झगड़े के केस हैंडल करने को मिलते हैं।

इसी बेवकूफी के चलते पहली बार उसे डी.सी.पी भगत (विपिन शर्मा) एक बड़ा केस जांच के लिए देता है। केस वैसे तो देखने में बडा आसान है। एक बहुत ही बडा न्यूज एंकर संजीव मेहरा ( नीरज काबी) जिसके दर्शक लगातार कम हो रहे हैं। मालिक उसे कभी भी निकाल सकता है। उसकी हत्या की साजिश में चार लोग विशाल त्यागी (अभीषेक बनर्जी) कबीर एम (आसिफ खान) तोप सिंह (जगजीत संधू) लिंगदोह (मेरीयमबम) को गिफतार किया जाता है।

हाथी राम अपने जूनियर अंसारी (इशवक सिंह) के साथ मिलकर जब तहकीकात करता है तो उसमें उसे एक बड़ी साजिश नज़र आती है। वह चारों मुज़रिमों के बारे में जानने के लिए उनके गांव निकल पड़ता है।

विशाल त्यागी चित्रकूट का रहने वाला है।उसकी तीन बहनों का बलात्कार हुआ था। उसने स्कूल में ही तीन लोगों का हथोडी मारकर बड़ी बेहरमी से हत्या कर दी थी। उस पर 45 हत्यायों का केस है।

हुक़्म सिंह पंजाब का मंजार है। एक दिन जाटों से तंग आकर जिसने कुछ जाट के लड़कों को बुरी तरह काट डाला था। जाटों ने बाद में उसकी मां के साथ बलात्कार किया था।

कबीर एम. के बारे में पता चलता है कि उसके भाई की लीचिंग हुई थी।एक लिंगदोह को उसका मामा ट्रेन में बिठाकर छोड़ गया था। उसके बाद निजामुद्दी रेलवे स्टेशन पर उसकी परवरिश होती है।

हाथी राम जैसे ही केस में पकड बनाता है। उसे सस्पेंड करके केस सी.बी.आई को दे दिया जाता है। सी.बी.आई उसका इंटरनेशनल लिंक जोड़ देती है। इस बात से संजीव मेहरा के साथ भी लोगों की सिमपेथी जुड़ जाती है और उसकी टी.आर.पी बढ़ जाती है।

हाथी राम लेकिन सी.बी.आई की प्रेस रिलीज से खुश नहीं है। वह सस्पेंड होने के बाद भी तहक़ीकात के लिए निकल जाता है। वह अपने स्तर पर ही पूरे केस का खुलासा करता है। चित्रकूट की एक बड़ी गैंग का सरदार दुनलिया है। गवाला गुजर उसके लिए काम करता है और त्यागी गवाला गुजर के लिए काम करता है।

यह हत्या एक पार्टी का नेता वाजपेई प्लान करता है। गवाला और वाजपेई के बड़े अच्छे संबंध हैं। उसकी सेक्रेटरी चंदा का हुक्म सिंह के साथ संबंध था। यही त्यागी के केस में होता है। विशाल गवाला के लिए गवाला मास्टर जी के लिए काम करता है। मास्टर जी का सबंध वाजपेई जी से होता है।

हाथी राम चोधरी अंत में जब उस बिखरी हुई कहानी को समेटता है और छोटी-से छोटी चीज का लिंक जोड़कर कहानी को पूरी करता है। दर्शक सोचते रह जाते हैं। यक़ीन मानों इंडिया में ऐसा स्क्रीन प्ले बहुत कम देखने को मिला है। आप जरा सा भी ठगा हुआ महसूस नहीं करोगे।

सिनेमा की नज़र से

वैबसीरीज राईटिंग का खेल है। सुदीप शर्मा ने उडता पंजाब, सोन चिर्रिया, एन.एच 10 जैसी फ़िल्में लिखी हैं। इन तीनों फ़िल्मों का तजुर्बा पाताल लोक में दिखाई पड़ता है। हुक़ुम सिंह की कहानी पंजाब के दबंगों से कनेक्ट है। विशाल त्यागी की कहानी चित्रकूट के डकेतों से कनेक्ट है। हाथी राम दिल्ली के आस-पास के दिखाये हैं। सुदीप क्योंकि इन जगहाओं पर पहले ही लिख चुके हैं। इसलिए वो अपने हर किरदार को उसकी भाषा को उसके रहन सहन और सामाजिक ढांचे को बहुत अच्छे से ना कि जानते हैं बल्कि समझते भी हैं।

सुदीप ने इसलिए आसानी से चार लेखकों की टीम के साथ बहुत कुछ ऐसा दिखा दिया जिसे दिखाना आसान नहीं था।उन्होंने किरदारों की भाषा पर बहुत ध्यान दिया है। एक छोटे से किरदार की भाषा को भी समझकर लिखा है। लेखकों की यही मेहनत देखने वालों की दिल जीत लेती है।

निर्देशक अवीनाश अरूण एक सिनेमेटोग्राफर हैं। उन्होंने किल्ला जैसी मराठी फ़िल्म में ही साबित कर दिया था कि वो क्या चीज हैं। एक दर्जन से ज़्यादा फ़िल्मों की सिनेमॉटोग्राफी कर चुके अवीनाश का किल्ला के बाद यह दूसरा निर्देशन है। तीन स्टेटों की कहानी सारे किरदार अलग-अलग कल्चर के हैं। उसके बाद भी कहीं ऐसा नहीं लगता कि ऐसा कुछ भी है जो निर्देशक अपने किरदारों के बारे में नहीं जानता है।

अवीनाश ही सिनेमेटोग्राफी भी देख रहे थे। उन्होंने उसमें में भी कमाल कर दिया है। कुछ फ्रेमिंग ऐसी हैं कि सीन को बहुत ही ज़्यादा शानदार बना देती हैं। इस सीरीज में कई जगह ऐसे सिम्बलों का इस्तेमाल निर्देशक ने किया है जिसे समझने के लिए भी पढ़ने की जरूरत पड़ेगी।

एक्टिंग में जयदीप अहलावत ने कमाल कर किया है। जयदीप अहलावत फौज में लेफटीनेंट बनना चाहते थे। उन्होंने एग्जाम भी दिया लेकिन फैल हुए। उसके बाद उन्होंने एक और एग्जाम दिया उसमें भी नहीं हो सके। वह जो बनना चाहते थे जो करना चाहते थे रियल में तो नहीं कर सके लेकिन स्क्रीन पर उन्होंने इतने मन से से किया है कि चोधरी हाथी राम के किरदार को अमर कर दिया।वासेपुर में शाहिद खान के छोटे से किरदार में दिखे थे। उसके बाद भी उन्होंने कुछ अच्छी फ़िल्में की हैं लेकिन अपनी अदाकारी से इस सीरीज को वो जिस मकाम तक ले गये। ऐसा लगता है जैसे इस रोल का कब से इंतजार कर रहे थे।

इसकी एक वज़ह यह भी है कि वो हरियाणा की मिट्टी में ही पले बढ़े हैं। वह हाथीराम के बारे सब जानते हैं कि वो कब गुस्सा होता है। वह कौन सी गाली देगा और कौन सी नहीं। वह गुस्से में होगा तो क्या करेगा। वह बच्चा ना पढ़े बर्दाश कर लेगा। उसका बच्चा पिटकर आये कभी बर्दाश नहीं करेगा।

जयदीप एक सीन में भी अपने किरदार से भटके हुए नहीं लगते। उनकी पत्नी के किरदार में गुल पनाग ने स्क्रीन पर उनका बहुत ही अच्छा साथ निभाया है। हालांकि कहीं-कहीं फैमली मैन की याद आ जाती है। इसके अलावा नीरज काबी से जो उम्मीदें थीं वो वैसा कुछ नहीं कर पाये। उनके सामने सारा के किरदार में (निहारिका दत्त) ने काफी अच्छा काम किया है। उन्होंने अपने छोटे से किरदार को अपनी कला से काफी अहम बना दिया।

अभीषेक बनर्जी पिछले कुछ सालों से सेकेंड रोल में ज़्यादातर निर्देशकों की पसंद रहे हैं। वह अब तक कई सारी फ़िल्मों और सीरीज का हिस्सा रह चुके हैं। इस सीरीज में उनका विशाल त्यागी का किरदार अच्छा तो है लेकिन स्क्रीन पर थोड़ा कम है। उनके साथ वाले किरदारों ने भी दर्शकों का बराबर ध्यान खींचा है।

नरेन चंदावरकर और बेनेडिक्ट टेलर भी उड़ता पंजाब और सोन चिर्रिया में काम कर चुके हैं। इस हिसाब से अगर देखें तो टेक्नीकल टीम में और राईटिंग टीम में ऐसे बहुत लोग हैं जिनका समबंध उड़ता पंजाब से रहा है। आदमी का नाम नहीं काम बोलता है। इन दोनों ने पाताल लोक के बैकग्राऊंड म्यूजिक से स्टोरी कहने में निर्देशक की मदद की है। खासकर क्रेडिट में जब गाना चलता है ‘सकल हंस में राम बिराजे’ मन को छू लेता है। 

एक अच्छी कामयाब सीरीज जिसे ना देखकर कोई अपना ही नुकसान करेगा।