अच्छा है
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यह 24 जून 2017 की रात थी। एसओजी एस.एस पी करन शर्मा की अगुवाई में इआरटी कमांडो और एसओजी टीम चुरू पुलिस और हरियाणा पुलिस के कुछ अधिकारी मालासर के पास खेतों में बने एक मकान के पास पहुचें। मकान के अंदर पुलिस की गिरफत्त से भागा, हत्या और अपहरण के 24 मामलों में लंबित 5 लांख का इनामी गैंगस्टर आनंदपाल था। कमांडों और पुलिस धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी, गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी और करीब एक घंटे बाद आग की तरह सारे राजस्थान में ख़बर फैल गई। राजपूतों का रोबिनहुड आनंदपाल सिंह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

आनंदपाल सिंह कौन था? वह छोटे से गांव का आम सा लड़का इतना बड़ा कैसे हो गया कि उसके मरने के बाद दो लांख से ज़्यादा लोग राजस्थान की सड़कों पर उतर आये। उसके मरने के हफ्तों बाद उसका अंतिम संस्कार हुआ। उसकी मौत पर हुए विवाद ने सरकार की चूलें हिला दीं। Zee5 पर रंगबाज फिर से  में आनंदपाल की कालेज से लेकर आखिरी रात की कहानी को दिखाया है।

निर्देशक: सचिन पाठक
लेखक: सिधार्थ मिश्रा
कलाकार: जिमी शेरगिल, सुशांत सिंह,गुल पनाग,शरद केलकर,ज़ीशान अय्यूब,सोनम अरोरा आदि।
प्लेटफार्म: Zee5

कहानी दर्शकों को नाटकीय तोर पर संजय सिंह मीना एस.पी राजस्थान (जीशान अय्यूब) बता रहे हैं। उनके ही कॉलेज का एक पढ़ने लिखने वाला लड़का अमरपाल सिंह (जिमी शेरगिल) आई.ए.एस की परीक्षा देता है। रिजल्ट आने से पहले लेकिन पंचायती चुनाव की रंजिश के चलते उसे पुलिस से उठवा दिया जाता है।

अमरपाल को उसका मित्र जयराम गोदारा (सुशांत सिंह) बाहर निकलवाता है। अमरपाल सिंह बाहर आते ही तांडव मचा देता है। वह अपने दुश्मन राजा सिंह फोगाट (शरद केलकर) के शराब के कारोबार में सेंद लगाकर धीरे-धीरे अपना कारोबार बढ़ा लेता है।

यहां से वर्चस्व की लड़ाई शुरू होती है। अमरपाल सिंह धीरे-धीरे अपने दुश्मनों को साफ कर रहा है। यह आपसी दुश्मनी धीरे-धीरे जातिवाद का रूप ले लेती है। राजपूतों का नेता मदन सिंह अमरपाल को राजनीति में लाने की तैयारी कर रहा है। उसे राजपूतों का नेता बनाने के रास्ते तलाश रहा है। मदन सिंह और जयराम गोदारा की लड़ाई हो जाती है। जयराम मदन सिंह को मार देता है और अमरपाल अपने सबसे करीबी दोस्त जयराम गोदारा को मार देता है। जयराम के बाद अमर पाल का सबसे करीबी दोस्त बलराम राठी (अमित सियाल) भी मारा जाता है।

अमरपाल सिंह जेल में होता है लेकिन काम संभालने के लिए उसे एक पढ़ी लिखी तेज़ तर्रार लेड़ी अनुप्रिया (गुल पनाग) मिल जाती है। जो अमर पाल के शराब के कारोबार को उस से भी ज़्यादा आगे ले जाती है। अमरपाल सिंह जेल से भाग जाता है। वह बाहर आकर राजस्थान की सरकार बनवाने में इसलिए मदद करता है कि सरकार उसकी मदद करेगी लेकिन उल्टा ही होता है। सरकार उसे मारने का प्लान करने लगती है, चारों तरफ नाकाबंदी हो जाती है। अमरपाल अपनी बेटी के कहने पर सरेंडर के लिए एक एप्लीकेशन देता है। लेकिन पुलिस उसे अरेस्ट करने की बजाय मार देती है। इस तरह अमर पाल का अध्याय ख़त्म होता है।

सिनेमाई नज़र से

आनंदपाल की असल कहानी और सीरीज की कहानी में लेखक सिधार्थ मिश्रा ने थोड़ी तो स्वतंत्रा ली है। ऐसा करके उन्होंने कहानी को सिनेमाई हिसाब से और बेहतर कर दिया है। नाटकीय बिंदू बड़े ही अच्छे से गढ़े हैं, जिसमें उन्होंने सामाजिक ताने-बाने राजनीति, कूटनीति, क्षेत्रवाद, दोस्ती, धोखा और भावनाओ को अच्छे से उकेरा है। हालांकि संवाद कभी राजस्थानी लगते हैं तो कभी नहीं लगते हैं।

सीरीज देखते हुए कुछ सीनों में प्रोडक्शन वैल्यू की कमी दिखाई देती है। लेकिन निर्देशक ने उसके बावजूद काफी अच्छे से कहानी पर अपनी पकड़ बनाये रखी है। हालांकि कुछ सीन खिचते हुए नज़र आते हैं और कुछ बहुत फ़िल्मी हो जाते हैं। जबकि यह बात सबको पता है कि सीरीज जिस आदमी की रियल लाईफ पर है, उसके जीवन में इतनी नाटकीयता नहीं थी।

फ़िल्मी दुनिया में एक कहावत है। अच्छा एक्टर ही अच्छे किरदार को चुन सकता है। इस सीरीज में जयराम गोधारा का किरदार अमरपाल के किरदार से भी भारी था। वह ऐसा किरदार है जो याद रह जाता है। कहानी में जगह-जगह उसकी कमी महसूस होती है। इस किरदार को सुशांत ने जिस स्तर पर जाकर निभाया है काबिले तारीफ है। वह हर बात से जाट ही दिखते हैं। देखने से भी और बुद्धि से भी।

जिम्मी शेरगिल इस से पहले साहेब बीवी और गैंगस्टर, तनु वेडस मनु,फैमस,फैमली ऑफ ठाकुरगंज,फगली, मुक्काबाज़ और शोरगुल बहुत ही फ़िल्मों में इस तरह के दबंग वाला किरदार कर चुके हैं। इनमे से बहुत सारी फ़िल्मों में उन्हें पसंद भी किया गया है। इस सीरीज में उन्होंने एक्टिंग तो अच्छी की है लेकिन वैसी ही जैसी की बाकी फ़िल्मों में उन्हें दर्शक देख चुके हैं।

इसके अलावा अमित सियाल का छोटा किरदार है लेकिन उन्होंने अच्छे से अपना किरदार निभाया है। इसके अलावा गुल पनाग की तारीफ करनी होगी, क्योंकि इस से पहले बड़े स्तर की फैमली मैन सीरीज में अपने किरदार से वो कुछ ख़ास नहीं कर पायी थीं। इस सीरीज में लेकिन उन्होंने जिस तरह की अदाकारी की है, जिस स्तर पर जाकर उन्होंने बहुत कम संवाद बोलकर उन्होंने एक तेज तर्रार लेड़ी का किरदार निभाया है, तारीफ के काबिल है।

कहानी राजस्थान की है, यह बताने से तो पता चलता है।  लोकेशन से लेकिन पता नहीं लग पाता है।

कोई क्यों देखे?

एक ऐसा आदमी जिसने राजस्थान की सरकार को हिला दिया था। जिसके मरने पर दो लांख से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतर आये थे। उस आदमी के जीवन के बारे में जानने के इच्छुक देख सकते हैं।

सेक्रेड गैम्स और मिर्जा पुर के बाद कोई अच्छी क्राईम सीरीज देखने का मन है तो यह सीरीज देखकर आपको अच्छा लगेगा।