कहानी पर पकड़ नहीं
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रसभरी की कहानी देखने में जितनी आसान है समझने में उतनी ही मुश्किल है। गांव देहातों में अक्सर लड़की लड़कियों पर भूत पिशाच का आ जाना सुना है। मनोवेज्ञानिकों का उस पर अलग कहना है। सामाजिक विज्ञानियों का उस पर अलग कहना है लेकिन हमे उस तरफ नहीं जाना।  जानिए हमारा सीरीज के बारे में यह कहना है।

क्रिएटर: निखिल नागेश भट्ट, तनवीर बुकवाला, शांतनु श्रीवास्तव
लेखक: शांतनु श्रीवास्तव
कलाकार: स्वरा भास्कर, आयुष्मान सक्सेना, नीलू कोहली, रश्मि अगडेकर
प्लेटफार्म: अमेज़न प्राइम वीडियो

आजकल छोटे शहरों की कहानियों पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है। अमेजन प्राइम पर आठ एपीसोड की यह सीरीज रसभरी भी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर मेरठ की कहानी है। यह बात अलग है कि सीरीज मेरठ की है यह स्क्रीन पर नहीं दिखता मुंह से बताना पड़ता है।

रसभरी एक इंग्लिश टीचर शानु मैडम (स्वरा भास्कर) की है। क्रेडिट से पहले सीरीज में शानु मैडम की पिछली जिंदगी के बारे में दिखाया जाता है। उसके मुताबिक शानु की सात बहन होती हैं। वह बचपन से ही अपने और अपने भाई के बीच फर्क देखती है। उसे कदम कदम पर लड़की होने का एहसास कराया जाता है। उसे अपनी इच्छाओं को मारना सिखाया जाता है।

शानु एक टीचर है लेकिन उसका पति जो उस से भी कम पढ़ा लिखा है। शानु मैडम को देखकर लोग उसके दिवाने हो जाते हैं। वह उसके घर के चक्कर काटने लगते हैं। वह जिस स्कूल में पढ़ातीं हैं वहां के टीचर वहां के स्टूडेंट सब उनके ख़्वाब देखने लगते हैं।

पप्पु तिवारी (सन्नी हिंदुजा) मैडम के घर का केबल ठीक करने के लिए जाता है। मैडम लेकिन उसे अलग ही रूप में दिखाई देती हैं। वह जब उनके घर से वापस आता है तो मैडम के बारे में कुछ ऐसी बातें बता देता है जिन्हें हर कोई सुनकर दंग रह जाता है।

शहर के पुलिस वाले से लेकर पान वाले तक सब मैडम को लेकर जो ख़्वाब देखते हैं उसे पूरा करना चाहते हैं। मैडम का एक स्टूडेंट नंद (अंशुमन सक्सेना) तो इस चक्कर में उनसे अंग्रेजी का टयूशन लगा लेता है और एक दिन मौका पाकर मैडम के साथ कोई गंदी हरकत कर देता है। मैडम का थप्पड़ भी खा जाता है।

नंद थप्पड़ का बदला लेने के लिए मैडम के पीछे हाथ धोकर पड़ जाता है। शहर के लोग और महिलाएं मैडम के बारे में अलग-अलग किस्म की बातें करते हैं। नंद किशोर मैडम के बारे में उनके पति से तहक़ीकात करता है तो उसे पता चलता है कि शहर के लोग मैडम के बारे में सच ही बोलते हैं।

मैडम को अचानक से कुछ हो जाता है। वह अपने होशो हवास खो देती हैं। वह अपने आपको शानु की जगह कोई रसभरी समझने लगती हैं। उस समय उनके सामने जो भी मर्द आ जाता है वो उसी को अपना ग्राहक समझने लगती हैं। वह किसी के भी साथ ऐसा अपने होशो हवास में नहीं करती हैं।

मैडम का पति तो ऐसा मानता है लेकिन मैडम जानबूझकर रसभरी बनती हैं कि कुछ दिमागी लोचा है नंद इस बात का पता लगाने में लग जाता है। सच्चाई क्या है वो सीरीज के अंत में जाकर पता चलती है।

सिनेमा की नजर से

इस समय जिस तरह की सीरीज आ रहीं हैं। रसभरी की उन सीरीज से तुलना की जाये तो रसभरी बहुत बड़ी सीरीज ना रहकर बहुत छोटी हो जाती है। इस सीरीज से निर्देशक क्या कहना चाहता था समझ में आते-आते रह जाता है। निर्देशक कुछ ही एपीसोड के बाद सीरीज के कंटेट से अपनी पकड़ खो देता है। कहानी का मुद्दा काफी गम्भीर हो सकता था लेकिन कहानी रसभरी की तरह ही भटकती रह जाती है।

निर्देशक की छोटी-छोटी से बहुत सारी ऐसी गलतियां है जो बताती हैं कि शूट गम्भीरता से नहीं किया गया है। जैसे- नंद और उसकी दोस्त जिस जगह मिलकर बैठकर बातें कर रहे हैं। वह एक तालाब के जैसा है जिसके चारो तरफ पहाड़ी जैसी है जबकि मेरठ एक समतल जगह है उसके आस-पास भी कहीं पहाड़ नहीं हैं। एक बात और किसी भी सीन में ऐसा नहीं लगता कि हम मेरठ देख रहे हैं। कुछ महिला के मुंह से खड़ी बोली सुनकर साफ समझ में आता है कि उनसे डॉयलॉग बुलवाया जा रहा है।

स्वरा भास्कर एक अच्छी खासी बड़ी एक्टर हैं। एक एक्टर को काम करते-करते भी इतना तजुर्बा हो जाता है कि कहानी से आऊट जा रहे सीन को समझ जायें। इस पूरी सीरीज में उनका वो तजुर्बा कहीं नज़र नहीं आता है। उनकी एक्टिंग को देखकर कहीं लगता कि कई बड़ी फ़िल्में कर चुकीं एक्टर रसभरी का किरदार निभा रहीं है।

हां नंद के किरदार में अंशुमन सक्सेना ने जो किरदार निभाया है उस पर थोड़ा ध्यान जाता है। उन्होंने कुछ हद तक देखने वालों का मनोरंजन करने की कोशिश की है लेकिन रसभरी का किरदार उनके किरदार को दबा देता है।

सीरीज को तकनीकी तौर पर देखा जाये तो बहुत ही साधारण है ऐसी कोई खास बात न कैमरे में और ना ही एडीटिंग में नजर आती जिसका जिक्र अलग से किया जाये। कुल मिलाकर एक गम्भीर मुद्दे पर सामान्य सीरीज है जिसे बहुत ही ऊपरी तौर पर लिखा और देखा गया है।

कोई क्यों देखे?

स्वरा भाष्कर एक अच्छी जानी-मानी कलाकार हैं। फ़िल्म क्रिटीक भी उनकी कई सारी फ़िल्मों की तारीफ कर चुके हैं। उनकी एक फ़िल्म अनार कली ऑफ आरा में उनके किरदार को लोगों ने बहुत पसंद किया था। रसभरी सीरीज में स्वरा भाष्कर ने दो किरदारों को एक साथ जिया है। उनका एक किरदार वैसा ही जैसा अनारकली ऑफ आरा में था और दूसरा वैसा ही है जैसा रांझणा में था। आगे आप समझदार हैं।