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एलिज़ाबेथ ने अपने पिता की मृत्यु के बाद 1952 में ब्रिटिश राजघराने की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय तक दो विश्व युद्द हो चुके थे। दुनिया की राजनीति में लगातार बदलाव हो रहे थे। ब्रिटिश उपनिवेश के बहुत सारे देश अलग हो चुके थे। भारत भी उन्हीं में शामिल था। ऐसे समय में एलिज़ाबेथ को ब्रिटिश साम्राज्य की रानी का ताज पहनाया गया।उस समय बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों को लगा था कि वह उस ताज का भार नहीं संभाल पायेंगीं।

एलिज़ाबेथ ने लेकिन सबको गलत साबित कर दिया। वह 2014 में ब्रिटेन के सबसे लम्बें समय तक राज करने वाली रानी बन गईं। इस ताज के मान सम्मान के बचाये रखने की कहानी दा क्राऊन  है। नेटफ्लिक्स पर जिसके तीन सीजन आ चुके हैं। जिसके बारे मे जानने के लिए एक नज़र देंखें।

निर्देशक: बेंजामिन कैरन

लेखक: पीटर मोर्गन

कलाकार: ओलिविया कोलमैन, टोबियास मेन्ज़ीस, बेन डेनियल, हेलेना बोनहम कार्टर

प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स

आज भी दुनिया भर के अख़बारों की नजरें ब्रिटिश राजघराने पर लगी रहती हैं। ब्रिटिश संविधान में रानी का स्थान क्या है, वह किस तरह वहां की सरकार के साथ काम करती हैं, उनके अधिकार में क्या आता है? सीरीज देखने के बाद आपको खुद समझ में आ जायेगा।

दा क्राऊन  सीरीज के अब तक के दोनों भाग एलिज़ाबेथ के निजी जीवन और ब्रिटेन वहां की राजनीति को दर्शातें हैं।  एलिज़ाबेथ किन परिस्थितियों में रानी बनीं और उनके सामने किस तरह की चुनोतियां आयीं। उन्होंने घर परिवार से लेकर राजनीति के क्षेत्र में भी किस तरह उन परिस्थितियों का सामना किया। जो ताज उनके सर पर था उसकी गरिमा को उन्होंने कैसे बनाये रखा।

एलिज़ाबेथ को दा क्राऊन के तीसरे सीजन में उम्र के दूसरे पड़ाव पर दिखाया है। पिछले दो सीजन तक क्लेयर फॉय ने एलिज़ाबेथ का किरदार निभाया था। इस तीसरे सीजन में क्लेयर की जगह ओलिविया कोलमैन ने एलिज़ाबेथ का किरदार निभाया है। 

एलिज़ाबेथ बाकी दो सीजनों की तरह ही इस तीसरे सीजन में भी कहानी के सेंटर में हैं। क्योंकि यह एक एतिहासिक ड्रामा है। जिसमें तथ्यों पर बहुत ही ज़्यादा जोर दिया गया है। राजघराने की राजनीति से लेकर ब्रिटेन में होने वाले राजनीतिक बदलाव, अंतरराषट्रीय स्तर पर होने वाले बदलाव, रूस और अमेरिका के बीच वर्चस्व की लडाई, अरब मुल्कों में मिस्र की नासेर की दख़्लअंदाजी को ब्रिटेन के नज़रिये से दिखाने की कोशिश की गई है।

एलिज़ाबेथ किस तरह अपने परिवार में चल रही कलह, अरब मुल्कों के संसाधनों पर मिस्र के नासेर की बढ़ती लालसा, राजघराने में घुस चुके रूसी जासूस, सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सलाहकार चर्चिल का मर जाना, उनकी जगह आये वामपंथी सरकार के नेता विलसन के साथ मिलकर सरकार चलाने जैसी सम्सयायों का हल ढूंढती नज़र आयेंगी।

सिनेमा की नज़र से

जिन लोगों ने कभी महारानी एलिज़ाबेथ और उनके पति फिलिप को नहीं देखा है।वह लोग दा क्राऊन के पहले दो एपीसोड में एलिज़ाबेथ के किरदार में क्लेयर फॉय को स्वीकार कर चुके थे, उस से कनेक्ट हो चुके थे। अब तीसरे सीजन में अचानक से ओलिविया कोलमैन का आना किरदारों के समझने में कंफयूज तो करता है

एक तो दोनों ही किरदारों के चेहरे में, बॉड़ी लेंग्वेज में, सोचने के नजिरये में, बोलने के अंदाज में बहुत ही बड़ा फर्क़ नज़र आता है।

तीसरे सीजन में 1972 तक के समय को समेटा गया है। ब्रिटेन में जब हेरोल्ड विल्सन सत्ता में आये थे। लेबर पार्टी के इस तेज तर्रार नेता से राईटविंग के ज़्यादातर लोगों को ख़तरा था। उसके बारे में तरह-तरह की अफवायें फैली थीं कि वह रूस में रहकर आया है। वह कम्यूनिष्ट विचारधारा को बढ़ावा देगा। एलिज़ाबेथ जबकि चर्चिल को बहुत ज़्यादा पसंद करती थीं।

प्रोडक्शन वैल्यु के हिसाब से बाकी सभी चीजें तो सही है। अच्छे कलाकार है, अच्छी एक्टिंग है। लेकिन दा क्राऊन के पहले दो सीजन की तरह ही तीसरा सीजन भी देखने में ऐसा लगता है कि लेखक ने पटकथा नहीं महारानी के लिए एक तोहफा लिखा है।

आप अगर ब्रिटेन के इतिहास को जानने के बारे में दिलचस्पी रखते हैं तो आपको लगेगा कि आप ने ग्रेट ब्रिटेन को सिर्फ एक साईड से देखा है, जहां सब कुछ एक बहुत अच्छा ही अच्छा है। और जो गलत था भी उस पर बड़ी चालाकी से महानता और रिवाजों की इमोशनल चादर डालने की कोशिश की गई है।

क्यों देखना चाहिए

किसी भी ऐतिहासिक ड्रामें को देखना किसी इतिहास की किताब पढ़ने जैसा ही होता है। सीरीज में जिस तरह से तथ्यों को दिखाया गया है, किसी किताब पढ़ने जैसा है। आप अगर दित्तीय विश्व युद्द के बाद दुनिया में हो रहे बदलाव को ब्रिटेन की नज़र से देखना चाहतें हैं, तो काफी कुछ जानने को मिलेगा। हालांकि सीरीज देखने के बाद आप उस से कितना इत्तेफाक रखते हैं वो आपकी नॉलिज पर निर्भर करता है।

आप ब्रिटेन शाही परिवार के लोगों के रहने-सहने का तरीका, उनकी खूबियां, महानता, दरियादिली और मजबूरियां  जानना चाहते हैं तो  दा क्राऊन देखने पर आप बहुत कुछ जान सकते हैं।