क्राइम थ्रिलर और गम्भीर
70%Overall Score

दूरदर्शन पर 2002 तक आंखों देखी के नाम से ख़बरों का एक प्रोग्राम आता था। उस प्रोग्राम की खास बात थी कि यह वही दिखाते थे जो आंखों से देखते थे। इसी प्रोग्राम के नाम पर फ़िल्म आंखों देखी बनीं जो काफी सफल भी रही। इसी प्रोग्राम के नाम से प्रभावित अब एक 10 एपीसोड की सीरीज अनदेखी बनी हैं। अनदेखी का मतलब है जो देखकर भी नहीं देखी जाती।  सीरीज देखने से पहले सीरीज के बारे में जानने के लिए पढ़ सकते हैं। 

निर्देशक: आशीशआर. शुक्ला
क्रिएटर: सिद्दार्थ सेनगुप्ता
कलाकार: हर्ष छाया, दिब्येंदु भट्टाचार्य,अभिषेक चौहान, सूर्या शर्मा।
प्लेटफार्म: सोनी लिव

इस सीरीज को क्रिएटर सिद्धार्थ सेनगुप्ता के साथ वरूण बडोला, उमेश पाडलकर और मोहिंदर प्रताप सिंह ने लिखा है। इस सीरीज से पहले चार लोगों की यही जोड़ी अपहरण जैसी क्राइम थ्रिलर सीरीज लिख चुकी है। सीरीज की कहानी अगर वनलाइन में देखें तो साधारण सी है।

अटवाल परिवार में दमन की शादी चल रही है। शादी में स्टेज पर दो लड़कियां डांस कर रही हैं। अटवाल परिवार का सबसे ख़तरनाक बेटा रिंकु(सूर्या शर्मा) सब संभाल रहा है। दिल्ली से शादी शूट करने आया ऋषि वीडियो शूट कर रहा है। दमन के पापा जी नशे में धुत होकर स्टेज पर चढ़ते हैं। वह डांस कर रही एक लड़की को पकड़ने की कोशिश करते हैं, लड़की उनको धक्का देती हैं। पापा जी गन निकालते हैं और लड़की का भेजा उड़ा देते हैं।

यही सीरीज का ड्रामेटिक पॉइंट हैं। रिंकु अपने पिता को पुलिस से बचाने के लिए अपने आदमियों से सारे सुबूत ख़त्म करा देता है। वह मरने वाली लड़की के साथ नाच रही दूसरी लड़की को कैद कर लेता है। शादी में आये सभी लोगों के फोन का डेटा डिलीट कर देता है। पुलिस अस्पताल सबको चुप करा देता है।

रिंकु की मुश्किलें तब बढ़ती हैं जब उन लड़कियों की तलाश में बंगाल का एक डी.सी.पी घोष (दिब्येंदु भट्टाचार्य) वहां पहुंचता है। शादी की वीडियों शूट कर रहा ऋषि पापा जी को गोली मारते हुए अपने कैमरे में कैद कर लेता है। ऋषि थाने में फोन करता है लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही रिंकु के आदमी उसे पकड़ लेते हैं। डी.सी.पी घोष रिंकु के पीछे हाथ धोकर पड़ जाता है।

अब यहां से सीरीज में सब प्लाट शुरू होते हैं। घोष बाबु किसी भी कीमत पर उन लड़कियों को बंगाल ले जाना चाहता है, क्या ले जा पायेगा?। ऋषि किसी भी तरह सुबूत मीडिया तक पहुंचाना चाहता है, पहुंचा पायेगा?। दमन की होने वाली पत्नी किसी भी तरह मर्डर के बारे में जानना चाहती है, जान पायेगी?। ऋषि की दोस्त सलोनी को किसी भी तरह ऋषि का सौदा करके पैसा चाहिए, कमा पायेगी?। बंगाली लड़की अपनी बहन का बदला लेना चाहती है, ले पायेगी?   इन सबको रोकने के लिए रिंकु राजेंद्र सिंह अटवाल खड़ा है जिसके ख़िलाफ पुलिस, प्रशासन, आम आदमी कोई भी जाने की हिम्मत नहीं करता, उसने सब खरीद रखे हैं, क्या वो इन्हें रोक पायेगा? इन्हीं सब सवालों के जवाब छिपाये सीरीज आगे बढ़ती है।

सिनेमा की नज़र से

इस सीरीज में कुछ बातें बहुत ही अच्छी हैं तो कुछ कमजोर भी हैं। हम सीरीज की अच्छी बातों की बात करेंगे तो सबसे पहले एक्टिंग आयेगी जिसमें सबसे पहले आयेंगे हर्ष छैया जिन्होंने पापा जी का किरदार निभाया है। हर्ष अटवाल परिवार के मुखिया बने हैं जो हमेशा शराब के नशे में रहते हैं, बात-बात पर गाली देते हैं उनके शुरू के सीन देखकर लगता है कि ड्रामा कर रहे हैं लेकिन दस एपीसोड पूरे देखने पर समझ आता है कि उन्होंने सबसे बेस्ट किरदार किया है और हर बात पर गाली दी है जिन्हें सुनकर मजा आता है।

उसके बाद सूर्या शर्मा जिन्होंने रिंकु चौधरी के किरदार में माहौल बनाये रखा है लेकिन गालियां इतनी गंदी-गंदी और डायरेक्ट दी है कि घर में बिना हैड फोन के नहीं देख सकते। सीरीज की सबसे बेस्ट कास्ट अगर चुनें तो सूर्या शर्मा और देबेन्दु भट्टाचार्य में से चुननी होगी। देबेन्दु भट्टाचार्य ने घोष पुलिस वाले का जो किरदार निभाया है शुरू के कुछ एपिसोड में एक्टिंग दमदार लगती है फिर बाद के कुछ एपिसोड में रिपीट जैसा लगने लगता है। इनके अलावा लकी के किरदार में (वरूण भगत) भी दर्शकों का ध्यान खींचने में कामयाब रहे।

निर्देशक की अच्छी बात रही कि दस एपिसोड में वो कहानी से ज़रा नहीं भटके हैं। शादी का माहौल और डर का माहौल बनाये रखा है। इस सीरीज की सबसे अच्छी बात है किरदारों की भाषा। सीरीज में दिल्ली, बंगाल और पंजाब तीन जगह के किरदार हैं। अच्छी बात है कि तीनों जगह के किरदार अपने क्षेत्र की असल भाषा बोल रहे हैं। सभी किरदारों की भाषा उनके रहन सहन और सामाजिक रीति रिवाज साफ अलग-अलग नज़र आते हैं। जो सीरीज में जान फूंक देते हैं।

निर्देशक की कुछ कमियां भी रहीं हैं जैसे दमन की होने वाली पत्नी तेजी हिन्दी टी.वी. धारावाहिकों के जैसी चाल चल रही है। दमन के परिवार की औरतें भी वैसी ही चाल चल रही हैं और दमन खुद वैसा ही रियेक्ट कर रहा है। एक मोबाइल सही करने वाला लड़का टिम्बा अचानक से रिंकु के गर्लफ्रेंड का आशिक निकल आता है। यह सब चीजें खलती हैं। एक अच्छी चल रही कहानी में अचानक से आये घटनाक्रम ऐसे लगते हैं कि जैसे अच्छी कहानी में अलग से पेबंद लगा दिया हो।

जो बातें हज़म नहीं होतीं

एक तो सारे पुलिस वाले फौजी अपने सीनियर को सर की जगह जनाब, जनाब बोल रहे हैं। कई बार कन्फ्यूजन हो जाता है अपने ही देश के हैं।

ऋषि के पास जो वीडियो है उसका डेटा इतना ज़्यादा है कि दो सीन में वो कॉपी करने की कोशिश करता है और कोई ना कोई आ जाता है। एक मोबाइल ठीक करने वाला उस सारे डेटा को दो सेकेंड में कॉपी कैसे कर लेता है। पर कैसे।

रिंकु मर्डर होने के बाद रिजॉर्ट से किसी को बाहर नहीं जाने दे रहा है। सब लोग डरे हुए हैं लेकिन फोन तो सबके काम कर रहे हैं। कोई फोन क्यों नहीं कर रहा है।

कोई क्यों देखे

अनदेखी के 32-32 मिनट के दस एपिसोड हैं यानि पांच घंटे आपके जायेंगे। इस सीरीज को अच्छी एक्टिंग के लिए देखा जा सकता है, अच्छी कहानी के लिए देखा जा सकता है। सीरीज देखने के बाद समय बर्बाद होने का दुख बिल्कुल भी नहीं होगा बल्कि मज़ा आयेगा अगर गालियां बर्दाशत कर लीं तो।